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मंगलवार, 9 सितंबर 2025
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शुक्रवार, 5 सितंबर 2025
नई नवेली दुल्हन
* नई नवेली दुल्हन *
* :- नई नवेली दुल्हन जब ससुराल में आई तो
* उसकी सास बोली :-
बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है।
* बहू ने पूछा :-
सासु माँ एक तो 'माँ' जिसने मुझे जन्म दिया और एक 'आप' हो और कौन सी माँ है ?
सास बडी खुश हुई कि मेरी बहू तो बहुत सीधी है।
* सास ने कहा :-
बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है! सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे।
सुबह दोनों एक साथ मन्दिर जाती है।
.....आगे सास पिछे बहू।
* जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर कहा :-
माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है, मैं बाल्टी लाती हूँ, और दूध निकालते है।
सास ने अपने सिर पर हाथ पिटा कि बहू तो "पागल" है और
* बोली :-
बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नहीं दे सकती।
चलो आगे।
* मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी।
* फिर बहू ने कहा :-
माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा।
* सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया।
और
* बोली :-
बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ?
चलो अंदर चलो मन्दिर में, और
* सास बोली :-
बेटा ये माता है,और इससे मांग लो, यह माता तुम्हारी मांग पूरी करेंगी ।
* बहू ने कहा :-
माँ ये मूर्ति तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है ? जब पत्थर की गाय दूध नहीं दे सकती ?
पत्थर का बछड़ा दूध पी नहीं सकता ?
पत्थर का शेर खा नहीं सकता ?
तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ?
"अगर कोई दे सकती हैं तो वो आप है"
" आप मुझे आशीर्वाद दीजिये "
तभी सास की आँखे खुली वो बहू पढ़ी लिखी थी,
तार्किक थी, जागरूक थी, तर्क और विवेक के सहारे बहु ने सास को जाग्रत कर दिया !
अगर मानवता की प्राप्ति करनी है, तो पहले असहायों, जरुरतमंदों, और गरीबो की सेवा करो
परिवार, समाज में लोगो की मदद करे ।
"अंधविश्वास और पाखण्ड को हटाना ही मानव सेवा है"
"मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया"
--- *यह संसार की रीत है*--
1. चूहा अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (गणेश की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।
2. सांप अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर का कंठहार मानकर)
लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता है, और जब तक मार न दे, चैन नही लेता।
3. बैल अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है।
4. कुत्ता अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (भैरुनाथ की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।
5. शेर अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (दुर्गा की सवारी मानकर)
लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है।
* हे मानव :-
"पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यो ?"
परमेश्वर माली
गौर से दो बार पढ़े✌
मानव जीवन में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं!!
जूतो का सीधा संबंध
जूते इसलिये भी चुराये जाते है क्योकि इसमें थ्रिल है ! जूते चुराना एक बहुत बडा आर्ट है ! बेहद सावधान ,चतुर ,दूरंदेश आदमी ही जूते चुरा सकता है ! किसी दूसरे के नये जूतो मे पैर डाल लेना ,ऐसा करते हुये देख लिये जाने पर अनजाने मे ऐसा कर जाने की एक्टिग करना हर किसी के बस की बात नही ! कला है ये और हर कलाकार की तरह जूते चुराने वालो को भी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिये नियमित रूप से मंदिर जाना पडता है !
मंदिर के पास किसी भक्त के उतारे नये जूतो को देखते ही अपने जूते पुराने लगने लगना स्वाभाविक सा ही है ! जूता चुराने वाला मान लेता है कि यह भगवान की इच्छा है कि वो आज नये जूते पहन कर घर जाये ! वह भगवान की बात टाल नही पाता और नये जूतो मे पाँव डाल लेता है !
अब जूते हमे़शा जरूरत के लिये ही चोरी किये जाये ऐसा भी नही है ! जूते सामने पडे है ! जूते नये दिख रहे हैं ! लावारिस है ! जूते उतारने वाला लापरवाह है ! किसी को रखवाली के लिये छोड नही गया है ! अपने आपको ज्यादा चतुर समझता है ! हीरोगिरी झाड रहा है ! बडे बाप की औलाद है ! जूतो की कद्र नही करता ! इन सब वजहो से भी जूते चुराना जरूरी हो जाता है !
सफलता पूर्वक जूता चुरा लेने मे खुशी है वह कोई बडी परीक्षा पास कर लेने या गोल्ड मैडल जीतने से कम नही होती ! जूता चुराने वाले सच्चे देशभक्त हैं ! वे केवल यह चाहते हैं कि आप नये जूते खरीदे ! आप नये जूते खरीदेगे ! अर्थव्यवस्था गति पकडेगी ! देश आगे बढेगा !
भगवान भरोसे रहने वाला कोई भी आदमी कभी यह भरोसा नही कर पाता कि भगवान जी से मिलकर लौटने पर उसकी अपने प्रिय जूतों से फिर मुलाक़ात हो भी सकेगी या नही ,पर मंदिर जाने पर जूते तो उतारना ही पड़ते है ! वह भारी मन से उतारता है जूते ! वैसे ही निहारता है अपने जूतो को ,जिस तरह युद्ध पर जाता फ़ौजी मुडमुड कर अपना बीबी बच्चो को देखता है !
मेरे ख़्याल से जूते ही ज़िम्मेदार है जीवन मरण के सिलसिले के ! ये ना होते तो हम लोग कब के तर गये होते ! होता ये है कि दर्शन करते वक़्त ये मन मे इस कदर घुसे रहते है कि उसमें भगवान के रहने की जगह ही नही बचती ! भगवान के सामने हाथ जोड़े वक्त भी ध्यान भगवान के बजाय जूतों मे लगा रहता है ,चतुर भक्तगण पूरी कोशिश करते है कि उनके जूते उनके क़ाबू मे बने रहे ,वे आमतौर पर अपने जूते मंदिर के प्रवेश द्वार के एन सामने उतारते है ताकि भगवान और जूतों को एक साथ देखा जाना सँभव हो सके, पर्याप्त सावधान भी बने रहते है पर भगवान की ही वजह से एकाध सैकेंड की चूक हो ही जाती है और भाई लोग आपके जूते पहन जाते है ,जूता चुराने वाले किसी भक्त की तुलना मे अपने लक्ष्य के प्रति ज्यादा एकाग्र और समर्पित होते है ! आप नंगे पाँव घर लौटते हैं और लौटते वक्त पूरे टाईम यह सोच सोच कर कन्फ़्यूज होते रहते है कि भगवान आपके और जूता चोर मे से किसका ज्यादा सगा है !
मंदिरों के जूता चोरों से अपने जूते बचाने के लिये श्रद्धालुओं द्वारा अनादि काल से तरह तरह से उपायों का अविष्कार किया जाता रहा है ,और इनमें से अपने दोनो पाँव के जूतों को एक दूसरे से अलग अलग ,पर्याप्त दूरी पर रख कर मंदिर मे प्रवेश करने का तरीका सर्वाधिक लोकप्रिय उपाय माना गया है ,मै खुद इस उपाय को आज़मा कर अनेक बार अपने जूतों को वापस पाने मे सफल हो चुका हूँ , कुछ लोग मंदिर जाने के लिये फटे पुराने जूते इस्तेमाल करते है और बहुत बार यह तरीका भी कारगर होता है .जूता चोर आपकी ग़रीबी पर तरस खा कर आपको बख़्श देते है ,अपनी कार मे ही जूते उतार जाना भी अपने जूतों के साथ बने रहने के आजमाये हुये सफल तरीक़ों मे से एक है ! पर यदि आप बे कार है तो कार वाला फ़ार्मूला आपके लिये नही है !
आप अपनी सुविधानुसार ऊपर लिखे इन तरीक़ों मे से किसी को भी आज़मा सकते है पर ये हमेशा काम करेंगे इसकी कोई गारंटी भगवान भी नही दे सकते !
सच्ची बात तो यह है कि जूते होते ही चोरी हो जाने के लिये हैं ! जूतों को चोरी होना है तो वे होगें ही ,मेरा यह मानना है कि मंदिर में प्रवेश करते वक्त ही यह मान लेना चाहिये कि ये जूते मुझसे पहले किसी और के थे और मेरे बाद किसी और के होगें, इसीलिये इस क्या लाया है और क्या ले जायेगा के ज्ञान को मानने वाले सच्चे आराधक मंदिर मे भगवान के सामने होते वक्त जूतों को लेकर क़तई विचलित नही होते ,वे पूरी तन्मयता से भगवान का ध्यान करते है ,और मंदिर से बाहर निकलने पर यदि वे पाते है कि उनके जूते अन्तर्ध्यान हो चुके हैं तो वे उतनी ही तन्मयता से अन्य श्रध्दालुओं द्वारा उतारे गये जूतों के ढेर से ऐसे जूते तलाश करते है जो उनके अपने चोरी जा चुके जूतों से अधिक बेहतर और नये से हों ,वे उन्हे निसंकोच पहनते हैं और भगवान का आभारी होते हुये सकुशल घर लौट आते हैं ,मंदिर से जूते पहन कर लौटने का यह सर्वाधिक कारगर और लोकप्रिय तरीका है ,और मै खुद इसी उपाय पर भरोसा करता हूँ और मंदिर से दसियो बार जूते चोरी होने के बावजूद इसी उपाय की कृपा से कभी नंगे पाँव घर नही लौटा ,और जूते भी हमेशा नये के नये ही बने रहे ! चूँकि आप भी समझदार है इसलिये मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य मे जब भी ऐसा मौका आयेगा आप भी मंदिर से लौटते वक्त बेहतर जूतों के साथ ही घर लौटेंगे !
गाय व भैंस के दूध में अंतर
गुरुवार, 19 अप्रैल 2018
सोना खरीदते वक्त, ऐसे करें असली-नकली की पहचान
हॉलमार्किंग में किसी उत्पाद को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। भारत में बीआईएस वह संस्था है, जो उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जा रहे गुणवत्ता स्तर की जांच करती है। यदि सोना-चांदी हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। लेकिन कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगा रहे हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं? असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है। उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है। असली सोने को अंक के हिसाब से भी आंका जा सकता है।
24 कैरेट- 99.9
23 कैरेट--95.8
22 कैरेट--91.6
21 कैरेट--87.5
18 कैरेट--75.0
17 कैरेट--70.8
14 कैरेट--58.5
9 कैरेट--37.5
1. कैरेट गोल्ड का मतलब होता हे 1/24 पर्सेंट गोल्ड, यदि आपके आभूषण 22 कैरेट के हैं तो 22 को 24 से भाग देकर उसे 100 से गुणा करें।(22/24)x100= 91.66 यानी आपके आभूषण में इस्तेमाल सोने की शुद्धता 91.66 फीसदी।
मसलन 24 कैरेट सोने का रेट टीवी पर 27000 है और बाजार में इसे खरीदने जाते हैं तो 22 कैरेट सोने का दाम (27000/24)x22=24750 रुपए होगा। जबकि ज्वैलर आपको 22 कैरेट सोना 27000 में ही देगा। यानी आप 22 कैरेट सोना 24 कैरेट सोने के दाम पर खरीद रहे हैं।
गोल्ड ज्वैलरी खरीदते वक्त सबसे पहले उसकी शुद्धता का पता लगाएं। 24 कैरेट गोल्ड सबसे शुद्ध होता है पर इससे ज्वैलरी नहीं बनती। गोल्ड ज्वैलरी 22 या 18 कैरेट के सोने से बनती है। यानी 22 कैरेट गोल्ड के साथ 2 कैरेट कोई और मेटल मिक्स किया जाता है। ज्वैलरी खरीदने से पहले हमेशा ज्वैलर्स से सोने की शुद्धता की जांच करा लें। सोने की शुद्धता जानने के लिए सोने का पिघाला भी जाता है।
कुछ केमिकल और एसिड होते हैं जिनके इस्तेमाल से सोने की गुणवत्ता परखी जा सकती है। सोने के संपर्क में आने के बाद इन पर कोई असर नहीं होता लेकिन अशुद्ध सोने के संपर्क में आने पर ये रियेक्ट करते हैं।
कई सुनार केडीएम को भी शुद्ध बताकर बेचते हैं, लेकिन इसमें कैडमियम नामक तत्व होता है, जोकि फेफड़ों के लिए हानिकारक होता है। साथ ही, इसमें तांबे की मिलावट भी होती है। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए आभूषण या सोने की किसी भी वस्तु पर अंक जरूर देखें। यहां पर सबसे अहम बात यह है कि अखबारों में प्रतिदिन छपने वाले या टीवी पर दिखाए जाने वाले सोने के दाम 24 कैरेट गोल्ड के होते हैं। इसलिए यदि आप 23, 22 या कम कैरेट का सोना खरीद रहे हैं, तो दाम कम होंगे।
गोल्ड खरीदते वक्त आप ऑथेंटिसिटी/प्योरिटी सर्टिफिकेट लेना न भूलें। सर्टिफिकेट में गोल्ड की कैरेट क्वॉलिटी भी जरूर चेक कर लें। साथ ही गोल्ड ज्वैलरी में लगे जेम स्टोन के लिए भी एक अलग सर्टिफिकेट जरूर लें।
अगर आपको मालूम नहीं है कि कॉमन बुलियन सिक्के कैसे दिखते हैं, तो इस बात की पूरी आशंका रहेगी कि आप बहुत ज्यादा खर्च करके भी नकली सोने सिक्का खरीद लेंगे। सिक्के हमेशा विश्वसनीय दुकानों से और ज्वैलरी हमेशा हॉलमार्क निशान वाली ही खरीदें। छोटे ज्वैलर्स के पास हॉलमार्क ज्वैलरी नहीं होती। ऐसे में वहां धोखा होने का डर ज्यादा होगा।
कई बार कंज्यूमर गोल्ड का मार्केट प्राइस जाने बगैर खरीदारी करने चले जाते हैं। ऐसा कभी न करें। इससे आपके पैसे भी ज्यादा खर्च होने की आशंका होगी और आपको सही वैल्यू भी नहीं मिल पाएगी।
असली और नकली सिक्कों की पहचान वे उसकी खनक से करते हैं। मेटल पर असली चांदी का सिक्का गिराने पर भारी आवाज, जबकि नकली सिक्का लोहे की तरह खनकता है। प्राचीन और विक्टोरियन सिक्के गोल व घिसे रहते हैं, जबकि नकली सिक्कों के किनारे कोर खुरदुरी रहती है।
शनिवार, 13 जून 2015
जानिए पूरे घर से जुड़ी वास्तु टिप्स, ऐसे बनाएं
आज हम आपको मकान के लगभग हर हिस्से से जुड़ी कुछ वास्तु टिप्स के बारे में बता रहे हैं। मकान बनाने की पहली प्रक्रिया भूखंड (प्लॉट) चयन से होती है। अगर आप वास्तु अनुरूप प्लॉट खरीदना चाहते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
7. संभव हो तो दक्षिणमुखी प्लॉट लेने से बचें।
मंगलवार, 9 जून 2015
जानिए वास्तु के उपयोगी नियम :-
पाण्डेय गृह निर्माण में यदि हम वास्तु नियमों का ध्यान रखेंगे तो परेशानियों का घर में जल्दी से आगमन नहीं होता है । सर्व प्रथम वास्तु संबंधी नियमों की दिशाओं का ज्ञान, उनके अधिपति, ग्रह तथा दिशाओं से संबंधित तत्वों का ज्ञान होना अति आवश्यक है। इसे और अच्छी तरह से इस
प्रकार समझा जा सकता है।
इन दिशाओं से संबंधित तत्व इस प्रकार हैं- उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) जल तत्व उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) वायु तत्व दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) अग्नि तत्व दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) पृथ्वी तत्व ब्रह्म स्थान (मध्य स्थान) आकाश तत्व जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश, पंच महाभूत तत्व कहे
जाते हैं। जिनसे मिलकर हमारा शरीर बना है।
इन पंचमहाभूतों से संबंधित ग्रह निम्नलिखित हैं- पृथ्वी – मंगल
जल – शुक्र अग्नि – सूर्य वायु – शनि आकाश – शनि साथ
ही चार अन्य ग्रहों (चंद्रमा, बुध, राहु और केतु) का संबंध,
क्रमशः मन, बुध, अहंकार एवं मोक्ष से है।
वास्तु के इस प्रारंभिक ज्ञान के बाद ‘अष्टदिशा वास्तु’ का
ज्ञान होना भी जन साधारण के लिए अतिआवश्यक है- इस
प्रकार दिशाओं के अनुरूप गृह निर्माण करवाने से घर में वास्तु
दोष होने का कोई कारण नजर नहीं आता, फिर भी शहरों में
स्थानाभाव के कारण छोटे-छोटे भूखंडों पर घर बनाने पड़ते हैं
साथ ही शहरों में अधिक संखया में लोग फ्लैट्स में ही रहते हैं
जो पहले से ही निर्मित होते हैं अतः घर पूर्णतया वास्तु सम्मत
हो, ऐसा संभव नहीं हो पाता। चाहकर भी हम उन वास्तु
दोषों को दूर नहीं कर पाते हैं और हमें उसी प्रकार उन वास्तु
दोषों को स्वीकार करते हुए अपने घर में रहना पड़ता है। ऐसी
परिस्थितियों में कुछ उपयोगी वास्तु टिप्स को अपनाकर गृह
दोषों को काफी सीमा तक कम किया जा सकता है।
यह महत्वपूर्ण जानकारियां निम्नलिखित हैं-
सर्वप्रथम घर के मुखय द्वार पर दृष्टि डालते हैं घर का मुखय
द्वार सदैव पूर्व या उत्तर में ही होना चाहिए किंतु यदि ऐसा
न हो पा रहा हो तो घर के मुखय द्वार पर ‘स्वास्तिक’ की
प्राण प्रतिष्ठा करवाकर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का
नाश और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है।
घर की स्थिति अनुकूल होने लगती है।
घर के मुखय द्वार पर तुलसी का पौधा रखें। सुबह उसमें जल
अर्पित करें तथा शाम को दीपक जलाएं। पूर्व या उत्तर दिशा
में तुलसी का पौधा लगाने से घर के सदस्यों में आत्मविश्वास
बढ़ता है।
घर की छत पर तुलसी का पौधा रखने से घर पर बिजली गिरने
का भय नहीं रहता। घर में किसी प्रकार के वास्तु दोष से बचने
के लिए घर में पांच तुलसी के पौधे लगाएं तथा उनकी नियमित
सेवा करें।
ध्यान रहे कि घर में खिड़की दरवाजों की संखया सम हो जैसे
(2, 4, 6, 8, 10) तथा दरवाजे खिड़कियां अंदर की तरफ ही
खुलें।
द्वार खुलते-बंद होते समय किसी भी प्रकार की कर्कश ध्वनि
नहीं आनी चाहिए। ये अशुभ सूचक होता है।
यदि किसी भिक्षुक को भिक्षा देनी हो तो घर से बाहर
आकर ही दें, अन्यथा अनहोनी होने की संभावना रहती है।
कलह से बचने के लिए घर में किसी देवी-देवता की एक से
अधिक मूर्ति या तस्वीर न रखें। किसी भी देवता की दो
तस्वीरें इस प्रकार न लगाएं कि उनका मुंह आमने-सामने हो।
देवी-देवताओं के चित्र कभी भी नैत्य कोण में नहीं लगाने
चाहिए अन्यथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझने की पूरी
संभावना रहती है।
किसी को कोई बात समझाते समय अपना मुंह पूर्व दिशा में
ही रखें। पढ़ते समय बच्चों का मुंह पूर्व दिशा में ही होना
चाहिए। चलते समय कभी भी पैर घसीटकर न चलें।
जीवन में स्थायित्व लाने के लिए सदैव अपने पैन से ही
हस्ताक्षर करें। इस बात का ध्यान रहे कि घर में कभी भी
फालतू सामान, टूटे-फूटे फर्नीचर, कूड़ा कबाड़ तथा बिजली
का सामान इकट्ठा न होने पाए। अन्यथा घर में बेवजह का
तनाव बना रहेगा। फटे-पुराने जूते-मौजे, छाते, अण्डर गारमेंट्स
आदि जितनी जल्दी हो सके घर से बाहर फैंक दें। नहीं तो घर में
सकारात्मक ऊर्जा का सर्वथा अभाव रहेगा और व्यर्थ की
परेशानियां घेरे रहेंगी।
फटे जूते मौजे और अण्डर गारमेंट्स प्रयोग में आने से शनि के
नकारात्मक पभ््र ााव भी झले ने पडत़े हैं।
धन वृद्धि के लिए तिजोरी का मुंह सदैव उत्तर या पूर्व दिशा
में ही होना चाहिए तथा जहां पर पैसे रखने हों वहां पर
सुगंधित दृव्य या इत्र, परफ्यूम आदि नहीं रखने चाहिए।
तिजोरी के दरवाजे पर कमल पर बैठी हुई तथा सफेद हाथियों
के झुन्ड के अग्र भाग से नहलाई जाती हुई लक्ष्मी जी की एक
तस्वीर लगाने से घर में निरंतर वृद्धि होती है।
दक्षिण की दीवार पर दर्पण कभी भी न लगाएं। दर्पण हमेशा
पूर्व या उत्तर की दीवार पर ही लगाना चाहिए। फ्लोरिंग,
दीवार या छत आदि पर दरारे नहीं पड़नी चाहिए। यदि ऐसा
है तो उन्हें शीघ्र ही भरवा देना चाहिए। घर के किसी भी
कोने में सीलन नहीं होनी चाहिए और न ही घर के किसी
कोने में रात को अंधेरा रहना चाहिए। शाम को कम से कम 15
मिनट पूरे घर की लाइट अवश्य जलानी चाहिए।
बिजली के स्विच, मोटर, मेन मीटर, टी.वी., कम्प्यूटर आदि
आग्नेय कोण में ही होने चाहिए इससे आर्थिक लाभ सुगमता से
होता है। घर में पुस्तकें रखने का स्थान उत्तर या पूर्व में ही
होना चाहिए तथा पुस्तकों को बंद अलमारी में ही रखना
चाहिए। टेलीफोन के पास कभी भी पानी का ग्लास या
चाय का कप नहीं रखना चाहिए। अन्यथा टेलीफोन ठीक से
काम नहीं करेगा और उसमें कुछ न कुछ गड़बड़ होती रहेगी। घर में
कभी भी मकड़ी के जाले नहीं लगने चाहिए नहीं तो राहु
खराब होता है तथा राहु के बुरे फल भोगने पड़ते हैं।
घर में कभी भी महाभारत, युद्ध, उल्लू आदि की तस्वीर नहीं
लगानी चाहिए। केवल शांत और सौम्य चित्रों से ही घर की
सजावट करनी चाहिए। अविवाहित कन्याओं के कमरे में सफेद
चांद का चित्र अवश्य लगाना चाहिए।
पूर्व की ओर मुख करके खाना खाने से आयु बढ़ती है। उत्तर की
ओर मुख करके भोजन करने से आयु तथा धन की प्राप्ति होती
है। दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करने से प्रेतत्व की
प्राप्ति होती है तथा पश्चिम की ओर मुख करके भोजन करने
से व्यक्ति रोगी होता है। भोजन की थाली कभी भी एक
हाथ से नहीं पकड़नी चाहिए। ऐसा करने से भोजन प्रेतयोनि
में चला जाता है। भोजन की थाली को सदैव आदरपूर्वक
दोनों हाथ लगाकर ही टेबल तक लाना चाहिए। यदि जमीन
पर बैठकर खाना-खाना है तो भोजन की थाली को सीधे
जमीन पर न रखकर किसी चौकी या आसन पर रखकर ही
भोजन ग्रहण करना चाहिए।
सोते समय गृहस्वामी का सिर सदैव दक्षिण केी तरफ ही
होना चाहिए इससे आयु वृद्धि होती है एवं गृह स्वामी का
पूर्ण प्रभुत्व घर पर बना रहता है। यदि प्रवास पर हों तो
पश्चिम की ओर सिर करके ही सोना चाहिए। जिससे
जितनी जल्दी हो सके अपने घर वापस आ सकें। घर में सीढ़ियों
का स्थान पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर ही
होना चाहिए, कभी भी उत्तर-पूर्व में सीढ़ियां न बनवाएं।
सीढ़ियों की संखया हमेशा विषम ही होनी चाहिए जैसे-
11, 13, 15 आदि। यदि घर में सीढ़ियों के निर्माण संबंधी
कोई दोष रह गया हो तो मिट्टी की कटोरी से ढक कर उस
स्थान पर जमीन के नीचे दबा दें।
ऐसा करने से सीढ़ियों संबंधी वास्तु दोषों का नाश होता है।
संध्या के समय घर में एक दीपक अवश्य जलाएं तथा ईश्वर से अपने
द्वारा किए गये पापों के लिए क्षमा याचना करें। यदि धन
संग्रह न हो पा रहा हो तो ”ऊँ श्रीं नमः” मंत्र का जप करें एवं
सूखे मेवे का भोग लक्ष्मी जी को लगाएं। यदि इन सब बातों
का ध्यान रखा जाए तो विघ्न, बाधाएं, परेशानियां हमें छू
भी नहीं सकेंगी, खुशियां हमारे घर का द्वार चूमेंगी, हमारे घर
की सीढ़ियां हमारे लिए सफलता की सीढ़ियां बन जाएंगी
तथा घर की बगिया हमेशा महकती रहेगी तथा घर का प्रत्येक
सदस्य प्रगति करता रहेगा।
गुरुवार, 19 मार्च 2015
हॉलमार्क लगा सोने के भी पूरी तरह खरा होने की गारंटी नहीं
सोने पर लगा हॉलमार्क सिर्फ शुद्धता की गारंटी नहीं, भरोसे का भी प्रतीक है। लेकिन हॉलमार्किंग सेंटर्स इस भरोसे को तोड़ रहे हैं। जो सोना आप खरीद रहे हैं, वह पूरा खरा ही है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। हॉलमार्क लगा होने के बावजूद नहीं। हॉलमार्किंग सेंटर्स 18 कैरेट सोने से बनी ज्वैलरी पर भी 22 कैरेट तक का हॉलमार्क लगा रहे हैं। इसका सीधा-सीधा नुकसान उपभोक्ताओं का ही है। भास्कर ने इस पूरे गोरखधंधे की पड़ताल की। स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सच जाना। यह स्टिंग जयपुर में किया गया, लेकिन इससे जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला है और पूरे देश का सच हो सकता है।
पहली बार भास्कर सामने लाया हॉलमार्किंग से ठगी का गणित
ठगी किस तरह- मुनाफा बढ़ाने को बिना जांचे हॉलमार्किंग
>कुछ ज्वैलर्स 18 कैरेट शुद्धता वाले स्वर्ण आभूषणों पर 22 कैरेट हॉलमार्क निशान लगाकर बेच रहे हैं।
>कुछ तो 22/20 कैरेट ज्वैलरी पर भी हॉलमार्क का ठप्पा लगाकर बेच रहे हैं, जबकि ऐसी ज्वैलरी पर हॉलमार्क हो ही नहीं सकता।
>हॉलमार्किंग सेंटर प्रति ज्वैलरी 25 रुपए का शुल्क लेते हैं। चूंकि ऐसे मुनाफा कम होता है, इसलिए सेंटर्स बिना शुद्धता जांचे ज्वैलर के मन मुताबिक हॉलमार्किंग कर देते हैं। बदले में ज्वैलर्स से ज्यादा चार्ज करते हैं।
हमने यूं पकड़ी...एक ठप्पे से 18 कैरेट का सोना बना 22 कैरेट का
> आभूषण कारोबारी सुरेंद मांधणा ने भास्कर के कहने पर सालासर हालमार्किंग सेंटर से एक अंगूठी पर हॉलमार्किंग कराई।
> अंगूठी 18 कैरेट की थी, मांधणा के कहने पर उस पर 22 कैरेट हॉलमार्क लगा दिया गया। जांच-परख तक नहीं की। सिर्फ कीमत ले ली।
पकड़े जाने पर दी सफाई
संभव है कि गलती से किसी आभूषण पर गलत हॉलमार्किंग कर दी गई हो। -उदय सोनी, निदेशक, सालासर हॉलमार्किंग सेंटर
सरकार ने बीआईएस से मांगी रिपोर्ट
हॉलमार्किंग स्कीम 14 साल पहले शुरू हुई है। अब सरकार इसे कानूनी मान्यता देने जा रही है। इसके लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) एक्ट में संशोधन होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने सोमवार को बीआईएस एक्ट 1986 में संशोधन के बारे में सभी पक्षों से चर्चा की। पासवान ने पूछ- क्या अलग-अलग कैरेट के गोल्ड के लिए अलग-अलग रेट्स हैं? उन्होंने इस बारे में अफसरों से रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा, 'मैंने तो आज तक 18-24 कैरेट गोल्ड ही सुना था। 9 कैरेट गोल्ड भी होता है, पता नहीं था।'
शुद्धता की गारंटी देने वाले हॉलमार्क सेंटर तो ग्राहकों के साथ छल कर ही रहे हैं। मॉनिटरिंग के जिम्मेदार भी ‘सो’ रहे हैं। खुद ज्वैलर्स मानते हैं कि 22 कैरेट गोल्ड में ग्राहकों को 91.6% शुद्धता मिलनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 88 फीसदी ही मिल पा रही है।
> ग्राहकों को हर माह 12 करोड़ रु. की चपत (केवल राजस्थान में)
> 3500 से ज्यादा ज्वैलर्स राजस्थान भर में
> 300 के पास ही है हॉलमॉर्किंग लाइसेंस
> 70% हॉलमार्किंग दिल्ली में (जयपुर में बिकने वाली ज्वैलरी की)
हद तो तब... ज्वैलर नहीं ले रहे शुद्धता की गारंटी
कोयम्बटूर ज्वैलरी एसो. ने हाल ही कोर्ट में याचिका में कहा है कि शुद्धता की जवाबदेही हॉलमार्क सेंटर्स की होनी चाहिए। इसी आधार पर उन्हें उस नियम के खिलाफ स्टे मिला, जिसमें जिम्मेदारी ज्वैलर्स पर थी।
सेंटरों की ही है जिम्मेदारी
सोने में शुद्धता की जिम्मेदारी हॉलमार्किंग सेंटर्स की है। गड़बड़ियां वहीं हो रही हैं। -कैलाश मितल, अध्यक्ष, जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी
शिकायत नहीं मिलती
कुछ सेंटर बिना जांचे हॉलमार्किंग कर रहे हैं, पर उपभोक्ताओं से शिकायत नहीं मिलती। -ए. के सिन्हा, निदेशक,
बीआईएस, जयपुर
शुद्धता का यह है सच- 22 कैरेट में मिलनी चाहिए 91.3% शुद्धता, मिल रही 88%
राजस्थान की बात करें तो राज्य के आभूषण विक्रेता हर दिन औसतन 200 किलो सोने के आभूषण बेचते हैं। इनमें से लगभग बीस फीसदी यानी 40 किलो हाॅलमार्क ज्वैलरी होती है। आभूषण विक्रेताओं से बातचीत के आधार पर 22 कैरेट हाॅलमार्क ज्वैलरी में सोने की शुद्धता 91.6% होनी चाहिए। लेकिन यह औसतन 88% ही बैठती है। ग्राहक को हर दस ग्राम आभूषणों की खरीद पर चार फीसदी यानी मौजूदा कीमतों पर 1,000 रु. का नुकसान होता है। ऐसेे में 40 किलो हाॅलमार्क ज्वैलरी की खरीद पर ग्राहकों को रोज 40 लाख रुपए की चपत लग रही है। इसके लिए बीआईएस और हालमार्क सेंटर जिम्मेदार है।
5 निशान देखकर खरीदें ज्वैलरी
1. बीआईएस का त्रिकोण वाला लोगो।
2. कैरेट का नंबर। यह प्रतिशत में लिखी होगी। उदाहरण के तौर पर-23 कैरेट ज्वैलरी पर लिखा होगा 958 यानी 95.8 फीसदी शुद्धता।
3. हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो।
4. जिस साल ज्वैलरी बनी उसका कोड।
5. ज्वैलरी शॉप का नाम।
http://m.bhaskar.com/news/referer/521/RAJ-JAI-sting-operation-of-fraud-in-gold-jewelry-4826333-PHO.html?pg=2
सोमवार, 23 फ़रवरी 2015
Kuchh vaastu tips
💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवश्य
लगाएं ।
💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |
💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं।
💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |
💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |
💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |
💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं |
💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |
💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |
💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |
💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |
💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |
💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |







