मंगलवार, 9 सितंबर 2025

❓क्या आपको पता है....❓

❓क्या आपको पता है....❓

      😡क्रोध का पूरा खानदान है..😡

 क्रोध की एक लाडली बहन है
             II ज़िद ॥

         क्रोध की पत्नी है
             ॥ हिंसा II

      क्रोध का बडा भाई है
            ॥ अंहकार ॥

क्रोध का बाप जिससे वह डरता है
                ॥ भय ॥

          क्रोध की बेटिया हैं
        ॥ निंदा और चुगली ॥

           क्रोध का बेटा है
                ॥ बैर ॥

  इस खानदान की नकचडी बहू है
                 ॥ ईर्ष्या॥

             क्रोध की पोती है
                 ॥ घृणा ॥

               क्रोध की मां है 
                ॥ उपेक्षा ॥

         और क्रोध का दादा है                        
                 ।। द्वेष ।।
   
    तो इस खानदान से हमेशा 
  दूर रहें और हमेशा खुश रहो।
इस मेसज को आगे भेजकर सबको   
 इस खानदान के बारे जानकारी दे।
              🙏धन्यवाद 🙏
     |||||||| "ये ही सत्य हैं" |||||

 Qus→   जीवन का उद्देश्य क्या है ?
Ans→  जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है - जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है..!!

Qus→  जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ? 
Ans→  जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया - वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है..!!

Qus→  संसार में दुःख क्यों है ?
Ans→  लालच, स्वार्थ और भय ही संसार के दुःख का मुख्य कारण हैं..!!

Qus→  ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की ?
Ans→  ईश्वर ने संसारकी रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की..!!

Qus→  क्या ईश्वर है ? कौन है वे ? क्या रुप है उनका ? क्या वह स्त्री है या पुरुष ?
 Ans→   कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वे भी है - उस महान कारण को ही आध्यात्म में 'ईश्वर' कहा गया है। वह न स्त्री है और ना ही पुरुष..!!

Qus→   भाग्य क्या है ?
Ans→  हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है तथा आज का प्रयत्न ही कल का भाग्य है..!!

Qus→   इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? 
Ans→   रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं और उसे सभी देखते भी हैं, फिर भी सभी को अनंत-काल तक जीते रहने की इच्छा होती है..इससे बड़ा आश्चर्य ओर क्या हो सकता है..!!

Qus→   किस चीज को गंवाकर मनुष्यधनी बनता है ?
Ans→   लोभ..!!

Qus→   कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है? 
Ans →   अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है..!!

Qus →   किस चीज़ के खो जानेपर दुःख नहीं होता ?
Ans →   क्रोध..!!

Qus→   धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है ?
Ans →   दया..!!

Qus→   क्या चीज़ दुसरो को नहीं देनी चाहिए ?
Ans→   तकलीफें, धोखा..!!

Qus→   क्या चीज़ है, जो दूसरों से कभी भी नहीं लेनी चाहिए ?
Ans→   इज़्ज़त, किसी की हाय..!!  

Qus→   ऐसी चीज़ जो जीवों से सब कुछ करवा सकती है?
Ans→   मज़बूरी..!!🌸

Qus→   दुनियां की अपराजित चीज़ ?
Ans→  सत्य..!!

Qus→ दुनियां में सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ ? Ans→   झूठ..!!💜

Qus→   करने लायक सुकून काकार्य ?
Ans→ परोपकार..!!🌸

Qus→   दुनियां की सबसे बुरी लत ?
Ans→ मोह..!!💝

Qus→   दुनियां का स्वर्णिम स्वप्न ?
Ans→   जिंदगी..!!🍀

Qus→   दुनियां की अपरिवर्तनशील चीज़ ?
Ans→   मौत..!!💜

Qus→   ऐसी चीज़ जो स्वयं के भी समझ ना आये ?
Ans→   अपनी मूर्खता..!!🌸

Qus→   दुनियां में कभी भी नष्ट/ नश्वर न होने वाली चीज़ ?
Ans→   आत्मा और ज्ञान..!!💝

Qus→   कभी न थमने वाली चीज़ ?
Ans→   समय..

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

नई नवेली दुल्हन

* नई नवेली दुल्हन *

* :-  नई नवेली दुल्हन जब ससुराल में आई तो

* उसकी सास बोली :-
बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है।

* बहू ने पूछा :-
सासु माँ एक तो 'माँ' जिसने मुझे जन्म दिया और एक 'आप' हो और कौन सी माँ है ?

सास बडी खुश हुई कि मेरी बहू तो बहुत सीधी है।

* सास ने कहा :-
बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है! सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे।

सुबह दोनों एक साथ मन्दिर जाती है।

.....आगे सास पिछे बहू।

* जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर कहा :-
माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है, मैं बाल्टी लाती हूँ, और दूध निकालते है।

सास ने अपने सिर पर हाथ पिटा कि बहू तो "पागल" है और

* बोली :-
बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नहीं दे सकती।

चलो आगे।

* मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी।

* फिर बहू ने कहा :-
माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा।

* सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया।

और

* बोली :-
बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ?

चलो अंदर चलो मन्दिर में, और

* सास बोली :-
बेटा ये माता है,और इससे मांग लो, यह माता तुम्हारी मांग पूरी करेंगी ।

* बहू ने कहा :-
माँ ये मूर्ति तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है ? जब पत्थर की गाय दूध नहीं दे सकती ?
पत्थर का बछड़ा दूध पी नहीं सकता ?
पत्थर का शेर खा नहीं सकता ?
तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ?

"अगर कोई दे सकती हैं तो वो आप है"

" आप मुझे आशीर्वाद दीजिये "

तभी सास की आँखे खुली वो बहू पढ़ी लिखी थी,

तार्किक थी, जागरूक थी, तर्क और विवेक के सहारे बहु ने सास को जाग्रत कर दिया !

अगर मानवता की प्राप्ति करनी है, तो पहले असहायों, जरुरतमंदों, और गरीबो की सेवा करो
परिवार, समाज में लोगो की मदद करे ।

"अंधविश्वास और पाखण्ड को हटाना ही मानव सेवा है"

"मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया"

--- *यह संसार की रीत है*--

1. चूहा अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (गणेश की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।

2. सांप अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर का कंठहार मानकर)

लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता है, और जब तक मार न दे, चैन नही लेता।

3. बैल अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है।

4. कुत्ता अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (भैरुनाथ की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।

5. शेर अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (दुर्गा की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है।

* हे मानव :-

"पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यो ?"     


      

परमेश्वर माली

गौर से दो बार पढ़े✌

गौर से दो बार पढ़े
*    जिस दिन हमारी मौत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रहा जाता है।
*    जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खर्च करने को पर्याप्त धन नहीं है।
*   जब हम चले जाते है तब भी बहुत सा धन बिना खर्च हुये बच जाता है।
*   एक चीनी बादशाह की मौत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डॉलर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नौकर से शादी कर ली। उस नौकर ने कहा -
"मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मैरे लिये काम करता था।"
             
                "सीख"
ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अर्जित करने के बजायें अधिक जिया जाये।
• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
   70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता तो!
    30% का पूर्ण उपयोग कैसे हो?
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहैं।
• धनी न होने पर भी परिपूर्ण रहें।
                   और
          बेहतर जीवन जीयें !!!
             
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
               
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
               
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
             
यदि आपके फ्रिज में खाना है,
बदन पर कपड़े हैं,
घर के ऊपर छत है और
सोने के लिये जगह है,
तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं आप।
यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं।
यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुश नसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें।
यदि आप मैसेज को वाकई पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं तो आप उन करोड़ों लोगों में खुश नसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते।
जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों मे हैं।
धन्यवाद!


परमेश्वर माली

मानव जीवन में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं!!


               समय, सम्बंध ओर दोस्ती ये वो खास तोहफे है जो हमें मिलते तो मुफ्त है पर जब ये कहीं खो जाते है तो इनकी कीमत का पता चलता है....  


तीन चीजों में मन लगाने से उन्नति होती है -
ईश्वर, परिश्रम और विद्या।
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√. तीन चीजों को कभी छोटी ना समझे - 
बिमारी, कर्जा और शत्रु।
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√. तीनों चीजों को हमेशा वश में रखो - 
मन, काम और लोभ।
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√. तीन चीज़ें निकलने पर वापिस नहीं आती - 
तीर कमान से, बात जुबान से और प्राण शरीर से।
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√. तीन चीज़ें कमज़ोर बना देती है - 
बदचलनी, क्रोध और लालच।
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√. तीन चीज़ें कोई चुरा नहीं सकता - 
अकल, चरित्र और हुनर।
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√. तीन व्यक्ति वक़्त पर पहचाने जाते हैं - 
स्त्री, भाई और दोस्त।
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√. तीनों व्यक्ति का सम्मान करो -
माता, पिता और गुरु।
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√. तीनों व्यक्ति पर सदा दया करो -
बालक, भूखे और पागल।
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√. तीन चीज़े कभी नहीं भूलनी चाहिए -
कर्ज़, मर्ज़ और फर्ज़।
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√. तीन बातें कभी मत भूलें -
उपकार, उपदेश और उदारता।
√. तीन चीज़े याद रखना ज़रुरी हैं -
सच्चाई, कर्तव्य और मृत्यु।
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√. तीन बातें चरित्र को गिरा देती हैं - 
चोरी, निंदा और झूठ।
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√. तीन चीज़ें हमेशा दिल में रखनी चाहिए -
नम्रता, दया और माफ़ी।
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√. तीन चीज़ों पर कब्ज़ा करो -
ज़बान, आदत और गुस्सा।
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√. तीन चीज़ों से दूर भागो -
आलस्य, खुशामद और बकवास।
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√. तीन चीज़ों के लिए मर मिटो -
धेर्य, देश और मित्र।
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√. तीन चीज़ें इंसान की अपनी होती हैं -
रूप, भाग्य और स्वभाव।
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√. तीन चीजों पर अभिमान मत करो –
धन, ताकत और सुन्दरता।
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√. तीन चीज़ें अगर चली गयी तो कभी वापस नहीं आती -
समय, शब्द और अवसर।
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√. तीन चीज़ें इन्सान कभी नहीं खो सकता -
शान्ति, आशा और ईमानदारी।
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√. तीन चीज़ें जो सबसे अमूल्य है -
प्यार, आत्मविश्वास और सच्चा मित्र।



अच्छे लोगों की इज्जत
  कभी कम नहीं होती।
सोने के सौ टुकड़े करो,
               फिर भी कीमत
                कम नहीं होती।
भूल होना "प्रकति " है,
मान लेना "संस्कृति" है,
सुधार लेना "प्रगति" है,




संग्रहण कर्ता- परमेश्वर दुगारिया (भोई राजमाली), गांव - बामनिया कलां, निवास स्थान - कुरज 

जूतो का सीधा संबंध


// जूतो का सीधा संबंध //
     जूतो का सीधा संबंध मंदिरो से है ! बहुत से लोग मंदिर जाते ही इसलिये हैं क्योकि वे अपने फिलहाल पहने जा रहे जूतों से बोर हो चुके है और अपने लिये नये जूते चाहते हैं ! और बहुत से लोग केवल इसलिए मंदिर नहीं जाते क्योकिं वे अपने जूतो से बहुत ज्यादा प्रेम करते है !

     जूते इसलिये भी चुराये जाते है क्योकि इसमें थ्रिल है ! जूते चुराना एक बहुत बडा आर्ट है ! बेहद सावधान ,चतुर ,दूरंदेश आदमी ही जूते चुरा सकता है ! किसी दूसरे के नये जूतो मे पैर डाल लेना ,ऐसा करते हुये देख लिये जाने पर अनजाने मे ऐसा कर जाने की एक्टिग करना हर किसी के बस की बात नही ! कला है ये और हर कलाकार की तरह जूते चुराने वालो को भी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिये नियमित रूप से मंदिर जाना पडता है !

     मंदिर के पास किसी भक्त के उतारे नये जूतो को देखते ही अपने जूते पुराने लगने लगना स्वाभाविक सा ही है ! जूता चुराने वाला मान लेता है कि यह भगवान की इच्छा है कि वो आज नये जूते पहन कर घर जाये ! वह भगवान की बात टाल नही पाता और नये जूतो मे पाँव डाल लेता है !

     अब जूते हमे़शा जरूरत के लिये ही चोरी किये जाये ऐसा भी नही है ! जूते सामने पडे है ! जूते नये दिख रहे हैं ! लावारिस है ! जूते उतारने वाला लापरवाह है ! किसी को रखवाली के लिये छोड नही गया है ! अपने आपको ज्यादा चतुर समझता है ! हीरोगिरी झाड रहा है ! बडे बाप की औलाद है ! जूतो की कद्र नही करता ! इन सब वजहो से भी जूते चुराना जरूरी हो जाता है !

     सफलता पूर्वक जूता चुरा लेने मे खुशी है वह कोई बडी परीक्षा पास कर लेने या गोल्ड मैडल जीतने से कम नही होती ! जूता चुराने वाले सच्चे देशभक्त हैं ! वे केवल यह चाहते हैं कि आप नये जूते खरीदे ! आप नये जूते खरीदेगे ! अर्थव्यवस्था गति पकडेगी ! देश आगे बढेगा !

     भगवान भरोसे रहने वाला कोई भी आदमी कभी यह भरोसा नही कर पाता कि भगवान जी से मिलकर लौटने पर उसकी अपने प्रिय जूतों से फिर मुलाक़ात हो भी सकेगी या नही ,पर मंदिर जाने पर जूते तो उतारना ही पड़ते है ! वह भारी मन से उतारता है जूते ! वैसे ही निहारता है अपने जूतो को ,जिस तरह युद्ध पर जाता फ़ौजी मुडमुड कर अपना बीबी बच्चो को देखता है !

     मेरे ख़्याल से जूते ही ज़िम्मेदार है जीवन मरण के सिलसिले के ! ये ना होते तो हम लोग कब के तर गये होते ! होता ये है कि दर्शन करते वक़्त ये मन मे इस कदर घुसे रहते है कि उसमें भगवान के रहने की जगह ही नही बचती ! भगवान के सामने हाथ जोड़े वक्त भी ध्यान भगवान के बजाय जूतों मे लगा रहता है ,चतुर भक्तगण पूरी कोशिश करते है कि उनके जूते उनके क़ाबू मे बने रहे ,वे आमतौर पर अपने जूते मंदिर के प्रवेश द्वार के एन सामने उतारते है ताकि भगवान और जूतों को एक साथ देखा जाना सँभव हो सके, पर्याप्त सावधान भी बने रहते है पर भगवान की ही वजह से एकाध सैकेंड की चूक हो ही जाती है और भाई लोग आपके जूते पहन जाते है ,जूता चुराने वाले किसी भक्त की तुलना मे अपने लक्ष्य के प्रति ज्यादा एकाग्र और समर्पित होते है ! आप नंगे पाँव घर लौटते हैं और लौटते वक्त पूरे टाईम यह सोच सोच कर कन्फ़्यूज होते रहते है कि भगवान आपके और जूता चोर मे से किसका ज्यादा सगा है !

     मंदिरों के जूता चोरों से अपने जूते बचाने के लिये श्रद्धालुओं द्वारा अनादि काल से तरह तरह से उपायों का अविष्कार किया जाता रहा है ,और इनमें से अपने दोनो पाँव के जूतों को एक दूसरे से अलग अलग ,पर्याप्त दूरी पर रख कर मंदिर मे प्रवेश करने का तरीका सर्वाधिक लोकप्रिय उपाय माना गया है ,मै खुद इस उपाय को आज़मा कर अनेक बार अपने जूतों को वापस पाने मे सफल हो चुका हूँ , कुछ लोग मंदिर जाने के लिये फटे पुराने जूते इस्तेमाल करते है और बहुत बार यह तरीका भी कारगर होता है .जूता चोर आपकी ग़रीबी पर तरस खा कर आपको बख़्श देते है ,अपनी कार मे ही जूते उतार जाना भी अपने जूतों के साथ बने रहने के आजमाये हुये सफल तरीक़ों मे से एक है ! पर यदि आप बे कार है तो कार वाला फ़ार्मूला आपके लिये नही है !

     आप अपनी सुविधानुसार ऊपर लिखे इन तरीक़ों मे से किसी को भी आज़मा सकते है पर ये हमेशा काम करेंगे इसकी कोई गारंटी भगवान भी नही दे सकते !

     सच्ची बात तो यह है कि जूते होते ही चोरी हो जाने के लिये हैं ! जूतों को चोरी होना है तो वे होगें ही ,मेरा यह मानना है कि मंदिर में प्रवेश करते वक्त ही यह मान लेना चाहिये कि ये जूते मुझसे पहले किसी और के थे और मेरे बाद किसी और के होगें, इसीलिये इस क्या लाया है और क्या ले जायेगा के ज्ञान को मानने वाले सच्चे आराधक मंदिर मे भगवान के सामने होते वक्त जूतों को लेकर क़तई विचलित नही होते ,वे पूरी तन्मयता से भगवान का ध्यान करते है ,और मंदिर से बाहर निकलने पर यदि वे पाते है कि उनके जूते अन्तर्ध्यान हो चुके हैं तो वे उतनी ही तन्मयता से अन्य श्रध्दालुओं द्वारा उतारे गये जूतों के ढेर से ऐसे जूते तलाश करते है जो उनके अपने चोरी जा चुके जूतों से अधिक बेहतर और नये से हों ,वे उन्हे निसंकोच पहनते हैं और भगवान का आभारी होते हुये सकुशल घर लौट आते हैं ,मंदिर से जूते पहन कर लौटने का यह सर्वाधिक कारगर और लोकप्रिय तरीका है ,और मै खुद इसी उपाय पर भरोसा करता हूँ और मंदिर से दसियो बार जूते चोरी होने के बावजूद इसी उपाय की कृपा से कभी नंगे पाँव घर नही लौटा ,और जूते भी हमेशा नये के नये ही बने रहे ! चूँकि आप भी समझदार है इसलिये मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य मे जब भी ऐसा मौका आयेगा आप भी मंदिर से लौटते वक्त बेहतर जूतों के साथ ही घर लौटेंगे !


//परमेश्वर दुगारिया//गांव- बामनिया कलां//निवास स्थान - कुरज//

गाय व भैंस के दूध में अंतर

गाय व भैंस के दूध में अंतर

*गाय व भैंस के दूध में अंतर*
जो बहुत कम लोग जानते हैं !

◆भैंस अपने बच्चे से पीठ फेर कर बैठती है चाहे उसके बच्चे को कुत्ते खा जायें वह नहीं बचायेगी, 

◆जबकि गाय के बच्चे के पास अनजान आदमी तो क्या शेर भी आ जाये तो जान दे देगी, परन्तु जीते जी बच्चे पर आँच नही आने देगी। 
इसीलिए उसके दूध में स्नेह का गुण भरपूर होता है।

◆भैंस को गन्दगी पसन्द है, कीचड़ में लथपथ रहेगी,, 

◆पर गाय अपने गोबर पर भी नहीं बैठेगी उसे स्वच्छता प्रिय है।

◆भैंस को घर से 2 किमी दूर तालाब में छोड़कर आ जाओ वह घर नहीं आ सकती उसकी याददास्त जीरो है। 

◆गाय को घर से 5 किमी दूर छोड़ दो। 
वह घर का रास्ता जानती है,आ जायेगी। 
गाय के दूध में #स्मृति तेज है।

◆दस भैंसों को बाँधकर 20 फुट दूर से उनके बच्चों को छोड़ दो, एक भी बच्चा अपनी माँ को नहीं पहचान सकता, 

◆जबकि गौशालाओं में दिन भर गाय व बछड़े अलग-अलग शैड में रखते हैं, सायंकाल जब सबका माता से मिलन होता है तो सभी बच्चे (हजारों की स॔ख्या में) अपनी अपनी माँ को पहचान कर दूध पीते हैं, ये है गाय दूध की याददास्त।

◆जब भैंस का दूध निकालते हैं तो भैंस सारा दूध दे देती है, 

◆परन्तु  गाय थोड़ा-सा दूध ऊपर चढ़ा लेती है, और जब उसके बच्चे को छोड़ेंगे तो उस चढ़ाये दूध को उतार देती है। 
ये गुण माँ के हैं जो भैंस मे नहीं हैं।

◆गली में बच्चे खेल रहे हों और भैंस भागती आ जाये तो बच्चों पर पैर अवश्य रखेगी...

◆लेकिन गाय आ जाये तो कभी भी बच्चों पर पैर नही रखेगी।

◆भैंस धूप और गर्मी सहन नहीं कर सकती...

◆जबकि गाय मई जून में भी धूप में बैठ सकती है।

◆भैंस का दूध तामसिक होता है.... 
जबकि गाय का सात्विक। 

◆भैंस का दूध आलस्य भरा होता है, उसका बच्चा दिन भर ऐसे पड़ा रहेगा जैसेे भाँग खाकर पड़ा हो। 
◆जब दूध निकालने का समय होगा तो मालिक उसे उठायेगा...

◆परन्तु गाय का बछड़ा इतना उछलेगा कि आप रस्सा खोल नहीं पायेंगे।

◆फिर भी लोग भैंस खरीदने में लाखों रुपए खर्च करते हैं.... 
जबकि गौमाता का दूध अमृत समान होता है।।


*🙏जय गौमाता🙏*


संग्रहण कर्ता- परमेश्वर दुगारिया (भोई राजमाली), गांव-बामनिया कलां, निवास स्थान - कुरज 

गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

सोना खरीदते वक्त, ऐसे करें असली-नकली की पहचान


सोना खरीदते वक्त, ऐसे करें असली-नकली की पहचान





उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बाजार में नकली सोने होने की आशंका जताई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 931 करोड़ रुपए का सोना तस्करी कर लाया गया है। इसलिए जरूरी है कि सोना खरीदते वक्त उसकी शुद्धता का ख्याल रखें। उसकी क्वॉलिटी पर जरूर गौर करें।
हॉलमार्क देखकर खरीदें ज्वैलरी
सबसे अच्छा है कि हॉलमार्क देखकर सोना खरीदें। हॉलमार्क सरकारी गारंटी है। हॉलमार्क का निर्धारण भारत की एकमात्र एजेंसी ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) करती है। हॉलमार्किंग योजना भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम के तहत संचालन, नियम और विनियम का काम करती है।



ऐसे पहचानें असली हॉलमार्क

हॉलमार्किंग में किसी उत्पाद को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। भारत में बीआईएस वह संस्था है, जो उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जा रहे गुणवत्ता स्तर की जांच करती है। यदि सोना-चांदी हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। लेकिन कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगा रहे हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं? असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है। उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है। असली सोने को अंक के हिसाब से भी आंका जा सकता है।
शुद्धता के हिसाब से दिए जाने वाले अंक

24 कैरेट- 99.9
23 कैरेट--95.8
22 कैरेट--91.6
21 कैरेट--87.5
18 कैरेट--75.0
17 कैरेट--70.8
14 कैरेट--58.5
9 कैरेट--37.5
24 कैरेट होता है असली सोना, नहीं बनती इसकी ज्वैलरी
असली सोना 24 कैरेट का ही होता है, लेकिन इसके अभूषण नहीं बनते, क्‍योंकि वो बेहद मुलायम होता है। आम तौर पर आभूषणों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें 91.66 फीसदी सोना होता है। हॉलमार्क पर पांच अंक होते हैं। सभी कैरेट का हॉलमार्क अलग होता। मसलन 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 पर 750 लिखा होता है। इससे शुद्धता में शक नहीं रहता।






ऐसे समझिए कैसे तय कर सकते हैं अपने गोल्ड की कीमत

1. कैरेट गोल्ड का मतलब होता हे 1/24 पर्सेंट गोल्ड, यदि आपके आभूषण 22 कैरेट के हैं तो 22 को 24 से भाग देकर उसे 100 से गुणा करें।(22/24)x100= 91.66 यानी आपके आभूषण में इस्‍तेमाल सोने की शुद्धता 91.66 फीसदी।


मसलन 24 कैरेट सोने का रेट टीवी पर 27000 है और बाजार में इसे खरीदने जाते हैं तो 22 कैरेट सोने का दाम (27000/24)x22=24750 रुपए होगा। जबकि ज्वैलर आपको 22 कैरेट सोना 27000 में ही देगा। यानी आप 22 कैरेट सोना 24 कैरेट सोने के दाम पर खरीद रहे हैं।

2. ऐसे ही 18 कैरेट गोल्ड की कीमत भी तय होगी। (27000/24)x18=20250 जबकि ये ही सोना ऑफर के साथ देकर ज्वैलर आपको छलते हैं।

नोटः यदि आप इस कैल्कुलेशन के हिसाब से सोना खरीदेंगे तो बाजार में कभी धोखा नहीं खाएंगे।




शुद्धता का ख्याल रखें

गोल्ड ज्वैलरी खरीदते वक्त सबसे पहले उसकी शुद्धता का पता लगाएं। 24 कैरेट गोल्ड सबसे शुद्ध होता है पर इससे ज्वैलरी नहीं बनती। गोल्ड ज्वैलरी 22 या 18 कैरेट के सोने से बनती है। यानी 22 कैरेट गोल्ड के साथ 2 कैरेट कोई और मेटल मिक्स किया जाता है। ज्वैलरी खरीदने से पहले हमेशा ज्वैलर्स से सोने की शुद्धता की जांच करा लें। सोने की शुद्धता जानने के लिए सोने का पिघाला भी जाता है।


एसिड टेस्ट

कुछ केमिकल और एसिड होते हैं जिनके इस्तेमाल से सोने की गुणवत्ता परखी जा सकती है। सोने के संपर्क में आने के बाद इन पर कोई असर नहीं होता लेकिन अशुद्ध सोने के संपर्क में आने पर ये रियेक्ट करते हैं।


निकेल और प्लैटिनम भी समझें
वाइट गोल्ड ज्वैलरी अगर आप ले रहे हैं तो निकेल या प्लैटिनम मिक्स के बजाए पैलेडियम मिक्स ज्वैलरी लेना बेहतर होगा। निकेल या प्लैटिनम मिक्स वाइट गोल्ड से स्किन एलर्जी होने का खतरा रहता है।



केडीएम और तांबे की होती है मिलावट

कई सुनार केडीएम को भी शुद्ध बताकर बेचते हैं, लेकिन इसमें कैडमियम नामक तत्व होता है, जोकि फेफड़ों के लिए हानिकारक होता है। साथ ही, इसमें तांबे की मिलावट भी होती है। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए आभूषण या सोने की किसी भी वस्‍तु पर अंक जरूर देखें। यहां पर सबसे अहम बात यह है कि अखबारों में प्रतिदिन छपने वाले या टीवी पर दिखाए जाने वाले सोने के दाम 24 कैरेट गोल्‍ड के होते हैं। इसलिए यदि आप 23, 22 या कम कैरेट का सोना खरीद रहे हैं, तो दाम कम होंगे।




प्योरिटी सर्टिफिकेट लेना न भूलें

गोल्ड खरीदते वक्त आप ऑथेंटिसिटी/प्योरिटी सर्टिफिकेट लेना न भूलें। सर्टिफिकेट में गोल्ड की कैरेट क्वॉलिटी भी जरूर चेक कर लें। साथ ही गोल्ड ज्वैलरी में लगे जेम स्टोन के लिए भी एक अलग सर्टिफिकेट जरूर लें।

विश्वसनीय दुकानों से खरीदें

अगर आपको मालूम नहीं है कि कॉमन बुलियन सिक्के कैसे दिखते हैं, तो इस बात की पूरी आशंका रहेगी कि आप बहुत ज्यादा खर्च करके भी नकली सोने सिक्का खरीद लेंगे। सिक्के हमेशा विश्वसनीय दुकानों से और ज्वैलरी हमेशा हॉलमार्क निशान वाली ही खरीदें। छोटे ज्वैलर्स के पास हॉलमार्क ज्वैलरी नहीं होती। ऐसे में वहां धोखा होने का डर ज्यादा होगा।


गोल्ड के प्राइज की जानकारी रखें

कई बार कंज्यूमर गोल्ड का मार्केट प्राइस जाने बगैर खरीदारी करने चले जाते हैं। ऐसा कभी न करें। इससे आपके पैसे भी ज्यादा खर्च होने की आशंका होगी और आपको सही वैल्यू भी नहीं मिल पाएगी।


खनक पर दें ध्यान

असली और नकली सिक्कों की पहचान वे उसकी खनक से करते हैं। मेटल पर असली चांदी का सिक्का गिराने पर भारी आवाज, जबकि नकली सिक्का लोहे की तरह खनकता है। प्राचीन और विक्टोरियन सिक्के गोल व घिसे रहते हैं, जबकि नकली सिक्कों के किनारे कोर खुरदुरी रहती है।

लीजिए पक्की पर्ची

सिक्का या ज्वैलरी खरीदते वक्त कच्ची पर्चियां लेने का ट्रेंड है। लेकिन यह गलत है। कई बार वापसी के वक्त ज्वैलर खुद ही अपनी कच्ची पर्ची नहीं पहचानते, इसलिए पक्का बिल जरूर लें। बिल में सोने का कैरेट, शुद्धता, मेकिंग चार्ज, हॉलमार्क का जिक्र जरूर हो।




परमेश्वर माली



शनिवार, 13 जून 2015

जानिए पूरे घर से जुड़ी वास्तु टिप्स, ऐसे बनाएं 

अपने सपनों का आशियाना बनवाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके इस घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, लेकिन कई बार ऐसा नहीं हो पाता। इसका कारण वास्तु दोष भी हो सकता है। इसलिए मकान बनवाते समय कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखा जाना आवश्यक होता है अन्यथा आगे जाकर कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।
आज हम आपको मकान के लगभग हर हिस्से से जुड़ी कुछ वास्तु टिप्स के बारे में बता रहे हैं। मकान बनाने की पहली प्रक्रिया भूखंड (प्लॉट) चयन से होती है। अगर आप वास्तु अनुरूप प्लॉट खरीदना चाहते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
सिद्धांत- प्लॉट पर भवन का निर्माण करवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसके केवल 60 प्रतिशत भाग पर ही निर्माण करवाएं यदि अधिक निर्मित भाग की आवश्यकता न हो तो इससे अधिक भाग भी खुला छोड़ा जा सकता है।
1. यदि कोने का प्लॉट हो तो सर्वश्रेष्ठ होगा।
2. आपका प्लॉट आस-पास के अन्य प्लॉटों या बस्ती से नीचे नहीं होना चाहिए। नहीं तो बरसात के दिनों में पानी आपके घर में घुस सकता है। साथ ही घर में हवा भी पर्याप्त नहीं आ सकेगी।
3. गंदा नाला, प्रदूषण वाली फैक्टरी, गंदगी, श्मशान, कब्रिस्तान अथवा मुर्दा-मवेशी निस्तारण आदि स्थानों के पास प्लॉट न लें।
4- प्लॉट के आस-पास जीर्ण-शीर्ण मकान, पुराना कुआं, क्षतिग्रस्त मंदिर या गड्ढा नहीं होना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने से वास्तु का आभामंडल प्रभावित होगा।
5- ऐसे प्लॉट का चयन करें जिसके उत्तर में आम रास्ता हो। इससे घर का प्रवेश द्वार उत्तर में रखा जा सकता है।
6- यदि आपके भूखंड के पूर्व की तरफ आम रास्ता निकलता हो तो भी बेहतर रहेगा। क्योंकि पूर्व दिशा से ही सूर्य निकलता है। ऐसे में पूर्व दिशा में घर का मुंह रखना शुभ व स्वास्थ्यवर्धक है।
7. संभव हो तो दक्षिणमुखी प्लॉट लेने से बचें।

कैसा हो आपके प्लॉट का साइज?
1. संभव हो तो चौकोर अथवा आयताकार प्लॉट खरीदें।
2. आदर्श प्लॉट की चौड़ाई तथा लंबाई का अनुपात 2:3 होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर- 40*60 वर्ग फुट का प्लॉट।
3. गौमुखी प्लॉट को सबसे शुभ माना जाता है। अर्थात ऐसा भूखंड जो सामने की तरफ से कम चौड़ा व पीछे से अधिक चौड़ा हो।
4. अगर उद्योग के लिए प्लॉट खरीद रहे हैं तो नाहरमुखी प्लॉट भी खरीद सकते हैं। अर्थात जिसकी आम रास्ते की तरफ वाली भुजा पीछे की भुजा से बड़ी हो।
5. प्लॉट के सामने पार्क हो या खुला स्थान हो तो बेहतर रहेगा।

घर में ऐसी होनी चाहिए पानी की व्यवस्था
घर बनवाते समय उसमें पानी की व्यवस्था के बारे में जरूर विचार करना चाहिए, क्योंकि यदि घर में समुचित पानी की व्यवस्था नहीं होगी तो इसके कारण आने वाले समय में परिवार के सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें-
1. बोरिंग, कुआं या भूमिगत वॉटर टैंक प्लॉट के उत्तरी ईशान या पूर्वी ईशान में ही बनवाएं। यदि संभव न हो तो उत्तर दिशा में भी बोरिंग आदि करवाया जा सकता है। अन्य दिशाओं में बोरिंग, कुआं आदि का निर्माण शुभ नहीं माना गया है।
2. बोरिंग मेन गेट, मुख्य द्वार के सामने न हो। चौक के बीच में, मकान की दीवार, बाथरूम, नाली या सैप्टिक टैंक के पास बोरिंग या कुआं नहीं होना चाहिए।
3. बोरिंग के लिए ऐसे स्थान का चयन करें, जहां आना-जाना कम हो तथा कीचड़ न हो। जहां से पानी सुगमता से टैंक में पहुंच जाए। साथ ही इन बातों का भी ध्यान रखें कि बिजली की लंबी लाइन न बिछानी पड़े।
4. अगर मकान के ऊपर पानी की टंकी बनवाना हो तो नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) उपयुक्त रहेगा।
5. सबसे अधिक गौर करने वाली बात है, भवन के समस्त जल का निष्कासन पूर्व, वायव्य (पश्चिम-उत्तर), उत्तर या ईशान(उत्तर-पूर्व) कोण में हो।

कैसी होनी चाहिए भवन की नींव?
मकान की नींव ही उसकी मजबूती का आधार होती है। नींव खुदवाते समय इन बातों पर गौर करें-
1. नींव ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से खोदनी प्रारंभ करना चाहिए। फिर आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) व वायव्य कोण (पश्चिम-उत्तर) की तरफ नींव खोदनी चाहिए। इसके बाद आग्नेय से नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) व वायव्य से नैऋत्य की ओर खुदवाना चाहिए।
2. सर्वप्रथम नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) से आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) व नैऋत्य से वायव्य (पश्चिम-उत्तर) की तरफ नींव भरवाना चाहिए। उसके बाद आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) से ईशान (उत्तर-पूर्व) की तरफ बढ़ते हुए नींव भरवानी चाहिए।
3. प्लींथ के ऊपर यदि दीवारों की मोटाई 25 इंच रखना चाहते हैं तो प्लींथ तक कम से कम दो फुट चौड़ी दीवार बनवानी चाहिए। यदि ऊपर केवल नौ इंच मोटी दीवारें बनवानी हों तो प्लींथ की दीवारों की मोटाई 15 से 18 इंच तक रखी जा सकती है। आपके प्लॉट की प्लींथ उसके आस-पास निर्मित भवनों से अधिक होना चाहिए। इससे हीन भावना आपके घर में प्रवेश नहीं करेगी।
4. यदि प्लॉट के आस-पास मकान नहीं भी बनें हो तो भी प्लींथ पर्याप्त ऊंची रखनी चाहिए ताकि भविष्य में भी आप हीन भावना से ग्रसित न हों।


कैसा हो आपका रसोई घर?
रसोई (किचन) घर का मह्त्वपूर्ण हिस्सा होती है। यहां अन्नपूर्णा मां का वास भी माना जाता है। रसोई का निर्माण करवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
1. रसोई घर आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में बनवाना चाहिए। यदि आग्नेय कोण में संभव न हो तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में भी बनवाई जा सकती है। रसोई के लिए नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) कम फलदायक होता है, जबकि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रसोई न हीं बनवाएं तो अच्छा है।
2. रसोई घर आग्नेय कोण में बनवाने के पीछे प्राकृतिक कारण भी है। चूंकि हवा प्राय: वायव्य कोण से आग्नेय कोण की ओर चलती है। इसलिए वास्तु शास्त्र में अग्नि यंत्र आदि के लिए आग्नेय कोण को सर्वश्रेष्ठ माना है। इसके पीछे तर्क है कि रसोई घर में फैलने वाली गंध, धुआं व गर्मी घर से बाहर नहीं निकलेगी तो पूरे मकान का वातावरण अशुद्ध हो जाएगा। यदि हवा वायव्य कोण से आग्नेय कोण की ओर बहेगी तो रसोई की सारी गंदगी, बदबू व गर्मी खिड़की के रास्ते घर से निकल जाएगी।
3. रसोई घर न अधिक बड़ा हो न अधिक छोटा। सामान्य आकार (50 वर्ग फुट) का रसोई घर होना चाहिए।
4. वर्तमान में कलात्मक रसोई घर बनवाने का प्रचलन है। इसलिए रसोई घर चार कोण, षटकोण या अष्टकोण का हो सकता है।
5. रसोई में एक खिड़की ऐसी बनवाएं, जो पूर्व दिशा को ओर खुले ताकि सूर्य की प्रात:कालीन किरणें रसोई घर में प्रवेश कर विषैले कीटाणुओं से मुक्त कर दे तथा नमी, सीलन आदि को भी समाप्त कर दे।



कैसा हो डाइनिंग रूम?
वर्तमान समय में डाइनिंग हॉल का चलन बढ़ गया है। पहले भी भोजन कक्ष होते थे किंतु उनका आकार-प्रकार अलग ही होता था। घर में डाइनिंग हॉल होना संपन्नता की निशानी है। डाइनिंग हॉल बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें-
1. जहां तक संभव हो भोजन कक्ष (डाइनिंग रूम) भवन के पश्चिम अथवा पूर्व में बनवाना चाहिए।
2. भोजन कक्ष के ठीक सामने मुख्य द्वार या शौचालय न हो।
3. भोजन पकाने और भोजन करने में दो विपरीत उर्जाएं काम में आती हैं। इसलिए बेहतर है कि भोजन कक्ष, रसोई घर से अलग ही हो।
4. भोजन कक्ष का फर्श घर के अन्य कमरों के फर्श से नीचा न हो। यदि संभव हो तो रसोई व भोजन कक्ष के फर्श को भवन के शेष फर्श से थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है। इससे हीन भावना नहीं आएगी। जहां तक संभव हो डाइनिंग टेबल आयताकार ही हो।
5. टाण्ड या अलमारी के नीचे बैठकर भोजन नहीं करें। इससे मानसिक दबाव बनेगा, जिसका असर पाचन क्रिया पर पड़ेगा। भोजन कक्ष में हवा व प्रकाश का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए।

ऐसी होना चाहिए कमरों की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई
कमरों की संख्या में भले ही समझौता कर लें, किंतु कमरों की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई में कभी समझौता नहीं करें। जानिए कैसी होना चाहिए कमरों की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई-
1. कमरे की ऊंचाई, चौड़ाई के बराबर या इससे अधिक ही होनी चाहिए। यदि इस सिद्धांत का पालन किया जाए तो वास्तु शास्त्र के अधिकांश नियमों की पालन स्वत: ही हो जाता है।
2. लिविंग रूम हवादार, प्रकाश युक्त व शीतलता देना वाला तभी हो सकता है, जब उसकी लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई पर्याप्त हो। लिविंग रूम की ऊंचाई 11 फुट से कम नहीं होनी चाहिए।
3. बाथरूम, स्टोर रूम आदि के ऊपर दुछत्ती डलवाते हुए छोटी साइज के स्टोर रूम बनवा सकते हैं। इन दुछत्तियों की ऊंचाई चार फुट से कम न रखी जाए ताकि सामान रखने व उतारने में आसानी रहे।
4. वर्तमान में आर.सी.सी की छत का चलन है। आर.सी.सी. के पिलर (कॉलम) बनते हैं। आर.सी.सी. के ही बीम डाले जाते हैं। इसलिए लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई अपनी मर्जी के अनुसार रखी जा सकती है।

कैसा हो घर का पूजा स्थल या मंदिर?
घर में पूजा स्थल होने से मन को शांति मिलती है और अगर यह वास्तु सम्मत हो तो और भी शुभ फल देता है।
1. घर में पूजा स्थल होना शुभता का परिचायक है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर की पवित्रता भी बनी रहती है। वहीं अगरबत्ती आदि के धुएं से वातावरण सुगंधित रहता है। विषाणु व कीटाणु घर में प्रवेश नहीं करते।
2. पूजा स्थल पूर्वी या उत्तरी ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में होना चाहिए। पूजा करने वाले का मुंह पश्चिम में हो तो अति शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व की ओर होना चाहिए।
3. शौचालय तथा पूजा घर पास-पास नहीं होना चाहिए। पूजा स्थल के समक्ष थोड़ा स्थान खुला होना चाहिए जहां आसानी से बैठा जा सके।
4. पूजा स्थल के नीचे कोई भी अग्नि संबंधी वस्तु जैसे- इन्वर्टर या विद्युत मोटर नहीं होना चाहिए। इस स्थान का उपयोग पूजन सामग्री, धार्मिक पुस्तकें, शुभ वस्तुएं रखने में किया जाना चाहिए।
5. पूजन में मूर्तियां अधिक न रखें। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियां खड़ी स्थिति में न हो।
6. पूजा स्थल का उपयोग ध्यान, संध्या या योग के लिए भी किया जा सकता है। इस स्थान को शांत रखें। धीमी रोशनी वाले बल्ब लगाएं। अंधेरा व सीलन न हो। जब भी आपका मन अशांत हो, यहां आकर आप नई ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

कैसी हो विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था?
घर चाहे बड़ा हो या छोटा, कच्चा हो या पक्का, गांव में हो या शहर में बिजली कनेक्शन आवश्यक है। अब तो बिजली हमारी जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुकी है। जानिए घर बनवाते समय विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था किस प्रकार की होनी चाहिए-
1. वास्तु शास्त्र के अनुसार बिजली का मीटर, जनरेटर, इनवर्टर आदि घर के आग्नेय कोण में ही स्थापित करवाने चाहिए। ऐसा करना संभव नहीं हो तो वायव्य कोण में भी लगाए जा सकते हैं।
2. आपके घर का प्रवेश द्वार जिस दिशा में हो, सामान्यत: बिजली का मीटर भी उसी दिशा में लगाया जाता है। वैसे अपनी सुविधानुसार मीटर बोर्ड आदि लगवा सकते हैं। प्रत्येक कमरे में प्रवेश करते समय दाईं तरफ स्विच बोर्ड लगवाने चाहिए।
3. बिजली फिटिंग हेतु निर्माण कार्यों के साथ-साथ ही आवश्यक कार्य करवाते रहें ताकि बाद में तोड़-फोड़ व खुदाई न करवानी पड़े।

घर में नहीं होना चाहिए तहखाना
बेसमेंट (तलघर या तहखाना) सभी घरों में नहीं बनवाया जाता। कुछ लोग ही इसे बनवाते हैं। यह सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही बनवाया जाता है। वास्तु के अनुसार घर में तहखाना होना ही नहीं चाहिए। यदि बनवाना आवश्यक हो तो नीचे लिखी बातों का ध्यान अवश्य रखें-
1. जहां तक हो सके घर में तहखाना बनाने से बचें, क्योंकि तहखाना अंधकार का सूचक है जो घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा का क्षय करता है। 2. तहखाना न बनवाने के पीछे एक तर्क यह भी है कि उससे संबंधित आशंकाओं का आपकी दिनचर्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा नींद भी पूरी नहीं होती।
3. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) तहखाना बनवाने के लिए उपयुक्त है।
4. व्यवसायिक भवनों/दुकानों के नीचे बेसमेंट की उपयोगिता है। इसलिए अवश्य बनवाना चाहिए।
5. आवासीय भवनों में यदि बेसमेंट बनवाएं तो वास्तु सम्मत हो इस बात का विशेष ध्यान रखें। बेसमेंट का आकार चूल्हे जैसा न हो।

कैसा हो आपका बेडरूम?
मनुष्य अपने जीवन का एक-तिहाई हिस्सा सोने में गुजारता है और यदि औसतन आयु 70 वर्ष मान लें तो सोने में बीतने वाला कुल समय 23 साल से अधिक होगा। यह तथ्य बेडरूम को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है, क्योंकि बेडरूम की ऊर्जा हमें दिनभर प्रभावित करती है। यदि ऊर्जा का प्रवाह ठीक तरह से नहीं हो रहा हो तो नतीजतन हमारी शारीरिक ऊर्जा को नुकसान पहुंचेगा। इससे दु:स्वप्न, अनिद्रा और गहरी उदासी जैसी अनेक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। शयनकक्ष की सबसे अच्छी स्थिति घर के दक्षिण-पश्चिम में होती है, क्योंकि इसका संबंध पृथ्वी तत्व से होता है, जो स्थिर और निष्क्रिय है।
यह नींद के लिए सबसे शांतिपूर्ण और आरामदायक स्थितियां प्रदान करता है। यदि दक्षिण-पश्चिम का कमरा बेडरूम के तौर पर नहीं बनाया जा सकता हो तो घर के पश्चिम या दक्षिण की तरफ में से किसी एक ओर का कमरा बेडरूम के तौर पर नहीं बनाया जा सकता हो तो घर के पश्चिम या दक्षिण की तरफ में से किसी एक ओर को चुनना चाहिए। यदि आपका मकान बहुमंजिला हो तो बेडरूम भूतल पर नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि यहां ऐसा लगेगा जैसे कोई आपकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है। बड़े कमरों में से किसी एक कमरे को बेडरूम बनाना चाहिए।

मंगलवार, 9 जून 2015

जानिए वास्तु के उपयोगी नियम :-

इस लेख के माध्यम से आप भी अपने घर में वास्तु के नियमों का पालन करके सुख शान्ति और समृद्धि माहैल प्राप्त कर सकते है। इसके लिए जानिए वास्तु के कुछ साधारण टिप्स – कौशल
पाण्डेय गृह निर्माण में यदि हम वास्तु नियमों का ध्यान रखेंगे तो परेशानियों का घर में जल्दी से आगमन नहीं होता है । सर्व प्रथम वास्तु संबंधी नियमों की दिशाओं का ज्ञान, उनके अधिपति, ग्रह तथा दिशाओं से संबंधित तत्वों का ज्ञान होना अति आवश्यक है। इसे और अच्छी तरह से इस
प्रकार समझा जा सकता है।
उत्तर-पूर्व को ईशान कोण, उत्तर-पश्चिम को वायव्य कोण, दक्षिण-पूर्व को आग्नेय कोण एवं दक्षिण-पश्चिम को नैत्य कोण कहते हैं।
इन दिशाओं से संबंधित तत्व इस प्रकार हैं- उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) जल तत्व उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) वायु तत्व दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) अग्नि तत्व दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) पृथ्वी तत्व ब्रह्म स्थान (मध्य स्थान) आकाश तत्व जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश, पंच महाभूत तत्व कहे
जाते हैं। जिनसे मिलकर हमारा शरीर बना है।
इन पंचमहाभूतों से संबंधित ग्रह निम्नलिखित हैं- पृथ्वी – मंगल
जल – शुक्र अग्नि – सूर्य वायु – शनि आकाश – शनि साथ
ही चार अन्य ग्रहों (चंद्रमा, बुध, राहु और केतु) का संबंध,
क्रमशः मन, बुध, अहंकार एवं मोक्ष से है।
वास्तु के इस प्रारंभिक ज्ञान के बाद ‘अष्टदिशा वास्तु’ का
ज्ञान होना भी जन साधारण के लिए अतिआवश्यक है- इस
प्रकार दिशाओं के अनुरूप गृह निर्माण करवाने से घर में वास्तु
दोष होने का कोई कारण नजर नहीं आता, फिर भी शहरों में
स्थानाभाव के कारण छोटे-छोटे भूखंडों पर घर बनाने पड़ते हैं
साथ ही शहरों में अधिक संखया में लोग फ्लैट्स में ही रहते हैं
जो पहले से ही निर्मित होते हैं अतः घर पूर्णतया वास्तु सम्मत
हो, ऐसा संभव नहीं हो पाता। चाहकर भी हम उन वास्तु
दोषों को दूर नहीं कर पाते हैं और हमें उसी प्रकार उन वास्तु
दोषों को स्वीकार करते हुए अपने घर में रहना पड़ता है। ऐसी
परिस्थितियों में कुछ उपयोगी वास्तु टिप्स को अपनाकर गृह
दोषों को काफी सीमा तक कम किया जा सकता है।
यह महत्वपूर्ण जानकारियां निम्नलिखित हैं-
सर्वप्रथम घर के मुखय द्वार पर दृष्टि डालते हैं घर का मुखय
द्वार सदैव पूर्व या उत्तर में ही होना चाहिए किंतु यदि ऐसा
न हो पा रहा हो तो घर के मुखय द्वार पर ‘स्वास्तिक’ की
प्राण प्रतिष्ठा करवाकर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का
नाश और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है।
घर की स्थिति अनुकूल होने लगती है।
घर के मुखय द्वार पर तुलसी का पौधा रखें। सुबह उसमें जल
अर्पित करें तथा शाम को दीपक जलाएं। पूर्व या उत्तर दिशा
में तुलसी का पौधा लगाने से घर के सदस्यों में आत्मविश्वास
बढ़ता है।
घर की छत पर तुलसी का पौधा रखने से घर पर बिजली गिरने
का भय नहीं रहता। घर में किसी प्रकार के वास्तु दोष से बचने
के लिए घर में पांच तुलसी के पौधे लगाएं तथा उनकी नियमित
सेवा करें।
ध्यान रहे कि घर में खिड़की दरवाजों की संखया सम हो जैसे
(2, 4, 6, 8, 10) तथा दरवाजे खिड़कियां अंदर की तरफ ही
खुलें।
द्वार खुलते-बंद होते समय किसी भी प्रकार की कर्कश ध्वनि
नहीं आनी चाहिए। ये अशुभ सूचक होता है।
यदि किसी भिक्षुक को भिक्षा देनी हो तो घर से बाहर
आकर ही दें, अन्यथा अनहोनी होने की संभावना रहती है।
कलह से बचने के लिए घर में किसी देवी-देवता की एक से
अधिक मूर्ति या तस्वीर न रखें। किसी भी देवता की दो
तस्वीरें इस प्रकार न लगाएं कि उनका मुंह आमने-सामने हो।
देवी-देवताओं के चित्र कभी भी नैत्य कोण में नहीं लगाने
चाहिए अन्यथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझने की पूरी
संभावना रहती है।
किसी को कोई बात समझाते समय अपना मुंह पूर्व दिशा में
ही रखें। पढ़ते समय बच्चों का मुंह पूर्व दिशा में ही होना
चाहिए। चलते समय कभी भी पैर घसीटकर न चलें।
जीवन में स्थायित्व लाने के लिए सदैव अपने पैन से ही
हस्ताक्षर करें। इस बात का ध्यान रहे कि घर में कभी भी
फालतू सामान, टूटे-फूटे फर्नीचर, कूड़ा कबाड़ तथा बिजली
का सामान इकट्ठा न होने पाए। अन्यथा घर में बेवजह का
तनाव बना रहेगा। फटे-पुराने जूते-मौजे, छाते, अण्डर गारमेंट्स
आदि जितनी जल्दी हो सके घर से बाहर फैंक दें। नहीं तो घर में
सकारात्मक ऊर्जा का सर्वथा अभाव रहेगा और व्यर्थ की
परेशानियां घेरे रहेंगी।
फटे जूते मौजे और अण्डर गारमेंट्स प्रयोग में आने से शनि के
नकारात्मक पभ््र ााव भी झले ने पडत़े हैं।
धन वृद्धि के लिए तिजोरी का मुंह सदैव उत्तर या पूर्व दिशा
में ही होना चाहिए तथा जहां पर पैसे रखने हों वहां पर
सुगंधित दृव्य या इत्र, परफ्यूम आदि नहीं रखने चाहिए।
तिजोरी के दरवाजे पर कमल पर बैठी हुई तथा सफेद हाथियों
के झुन्ड के अग्र भाग से नहलाई जाती हुई लक्ष्मी जी की एक
तस्वीर लगाने से घर में निरंतर वृद्धि होती है।
दक्षिण की दीवार पर दर्पण कभी भी न लगाएं। दर्पण हमेशा
पूर्व या उत्तर की दीवार पर ही लगाना चाहिए। फ्लोरिंग,
दीवार या छत आदि पर दरारे नहीं पड़नी चाहिए। यदि ऐसा
है तो उन्हें शीघ्र ही भरवा देना चाहिए। घर के किसी भी
कोने में सीलन नहीं होनी चाहिए और न ही घर के किसी
कोने में रात को अंधेरा रहना चाहिए। शाम को कम से कम 15
मिनट पूरे घर की लाइट अवश्य जलानी चाहिए।
बिजली के स्विच, मोटर, मेन मीटर, टी.वी., कम्प्यूटर आदि
आग्नेय कोण में ही होने चाहिए इससे आर्थिक लाभ सुगमता से
होता है। घर में पुस्तकें रखने का स्थान उत्तर या पूर्व में ही
होना चाहिए तथा पुस्तकों को बंद अलमारी में ही रखना
चाहिए। टेलीफोन के पास कभी भी पानी का ग्लास या
चाय का कप नहीं रखना चाहिए। अन्यथा टेलीफोन ठीक से
काम नहीं करेगा और उसमें कुछ न कुछ गड़बड़ होती रहेगी। घर में
कभी भी मकड़ी के जाले नहीं लगने चाहिए नहीं तो राहु
खराब होता है तथा राहु के बुरे फल भोगने पड़ते हैं।
घर में कभी भी महाभारत, युद्ध, उल्लू आदि की तस्वीर नहीं
लगानी चाहिए। केवल शांत और सौम्य चित्रों से ही घर की
सजावट करनी चाहिए। अविवाहित कन्याओं के कमरे में सफेद
चांद का चित्र अवश्य लगाना चाहिए।
पूर्व की ओर मुख करके खाना खाने से आयु बढ़ती है। उत्तर की
ओर मुख करके भोजन करने से आयु तथा धन की प्राप्ति होती
है। दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करने से प्रेतत्व की
प्राप्ति होती है तथा पश्चिम की ओर मुख करके भोजन करने
से व्यक्ति रोगी होता है। भोजन की थाली कभी भी एक
हाथ से नहीं पकड़नी चाहिए। ऐसा करने से भोजन प्रेतयोनि
में चला जाता है। भोजन की थाली को सदैव आदरपूर्वक
दोनों हाथ लगाकर ही टेबल तक लाना चाहिए। यदि जमीन
पर बैठकर खाना-खाना है तो भोजन की थाली को सीधे
जमीन पर न रखकर किसी चौकी या आसन पर रखकर ही
भोजन ग्रहण करना चाहिए।
सोते समय गृहस्वामी का सिर सदैव दक्षिण केी तरफ ही
होना चाहिए इससे आयु वृद्धि होती है एवं गृह स्वामी का
पूर्ण प्रभुत्व घर पर बना रहता है। यदि प्रवास पर हों तो
पश्चिम की ओर सिर करके ही सोना चाहिए। जिससे
जितनी जल्दी हो सके अपने घर वापस आ सकें। घर में सीढ़ियों
का स्थान पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर ही
होना चाहिए, कभी भी उत्तर-पूर्व में सीढ़ियां न बनवाएं।
सीढ़ियों की संखया हमेशा विषम ही होनी चाहिए जैसे-
11, 13, 15 आदि। यदि घर में सीढ़ियों के निर्माण संबंधी
कोई दोष रह गया हो तो मिट्टी की कटोरी से ढक कर उस
स्थान पर जमीन के नीचे दबा दें।
ऐसा करने से सीढ़ियों संबंधी वास्तु दोषों का नाश होता है।
संध्या के समय घर में एक दीपक अवश्य जलाएं तथा ईश्वर से अपने
द्वारा किए गये पापों के लिए क्षमा याचना करें। यदि धन
संग्रह न हो पा रहा हो तो ”ऊँ श्रीं नमः” मंत्र का जप करें एवं
सूखे मेवे का भोग लक्ष्मी जी को लगाएं। यदि इन सब बातों
का ध्यान रखा जाए तो विघ्न, बाधाएं, परेशानियां हमें छू
भी नहीं सकेंगी, खुशियां हमारे घर का द्वार चूमेंगी, हमारे घर
की सीढ़ियां हमारे लिए सफलता की सीढ़ियां बन जाएंगी
तथा घर की बगिया हमेशा महकती रहेगी तथा घर का प्रत्येक
सदस्य प्रगति करता रहेगा।

गुरुवार, 19 मार्च 2015

हॉलमार्क लगा सोने के भी पूरी तरह खरा होने की गारंटी नहीं

सोने पर लगा हॉलमार्क सिर्फ शुद्धता की गारंटी नहीं, भरोसे का भी प्रतीक है। लेकिन हॉलमार्किंग सेंटर्स इस भरोसे को तोड़ रहे हैं। जो सोना आप खरीद रहे हैं, वह पूरा खरा ही है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। हॉलमार्क लगा होने के बावजूद नहीं। हॉलमार्किंग सेंटर्स 18 कैरेट सोने से बनी ज्वैलरी पर भी 22 कैरेट तक का हॉलमार्क लगा रहे हैं। इसका सीधा-सीधा नुकसान उपभोक्ताओं का ही है। भास्कर ने इस पूरे गोरखधंधे की पड़ताल की। स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सच जाना। यह स्टिंग जयपुर में किया गया, लेकिन इससे जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला है और पूरे देश का सच हो सकता है।

 

पहली बार भास्कर सामने लाया हॉलमार्किंग से ठगी का गणित

ठगी किस तरह- मुनाफा बढ़ाने को बिना जांचे हॉलमार्किंग
>कुछ ज्वैलर्स 18 कैरेट शुद्धता वाले स्वर्ण आभूषणों पर 22 कैरेट हॉलमार्क निशान लगाकर बेच रहे हैं।
>कुछ तो 22/20 कैरेट ज्वैलरी पर भी हॉलमार्क का ठप्पा लगाकर बेच रहे हैं, जबकि ऐसी ज्वैलरी पर हॉलमार्क हो ही नहीं सकता।
>हॉलमार्किंग सेंटर प्रति ज्वैलरी 25 रुपए का शुल्क लेते हैं। चूंकि ऐसे मुनाफा कम होता है, इसलिए सेंटर्स बिना शुद्धता जांचे ज्वैलर के मन मुताबिक हॉलमार्किंग कर देते हैं। बदले में ज्वैलर्स से ज्यादा चार्ज करते हैं।

 

हमने यूं पकड़ी...एक ठप्पे से 18 कैरेट का सोना बना 22 कैरेट का

> आभूषण कारोबारी सुरेंद मांधणा ने भास्कर के कहने पर सालासर हालमार्किंग सेंटर से एक अंगूठी पर हॉलमार्किंग कराई। 
> अंगूठी 18 कैरेट की थी, मांधणा के कहने पर उस पर 22 कैरेट हॉलमार्क लगा दिया गया। जांच-परख तक नहीं की। सिर्फ कीमत ले ली।

पकड़े जाने पर दी सफाई
संभव है कि गलती से किसी आभूषण पर गलत हॉलमार्किंग कर दी गई हो। -उदय सोनी, निदेशक, सालासर हॉलमार्किंग सेंटर

 

सरकार ने बीआईएस से मांगी रिपोर्ट

हॉलमार्किंग स्कीम 14 साल पहले शुरू हुई है। अब सरकार इसे कानूनी मान्यता देने जा रही है। इसके लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस)  एक्ट में संशोधन होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने सोमवार को बीआईएस एक्ट 1986 में संशोधन के बारे में सभी पक्षों से चर्चा की। पासवान ने पूछ- क्या अलग-अलग कैरेट के गोल्ड के लिए अलग-अलग रेट्स हैं? उन्होंने इस बारे में अफसरों से रिपोर्ट मांगी है। उन्‍होंने कहा, 'मैंने तो आज तक 18-24 कैरेट गोल्ड ही सुना था। 9 कैरेट गोल्ड भी होता है, पता नहीं था।'

शुद्धता की गारंटी देने वाले हॉलमार्क सेंटर तो ग्राहकों के साथ छल कर ही रहे हैं। मॉनिटरिंग के जिम्मेदार भी ‘सो’ रहे हैं। खुद ज्वैलर्स मानते हैं कि 22 कैरेट गोल्ड में ग्राहकों को 91.6% शुद्धता मिलनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 88 फीसदी ही मिल पा रही है।

 

> ग्राहकों को हर माह 12 करोड़ रु. की चपत (केवल राजस्‍थान में) 
> 3500 से ज्यादा ज्वैलर्स राजस्थान भर में
> 300 के पास ही है हॉलमॉर्किंग लाइसेंस
> 70% हॉलमार्किंग दिल्ली में (जयपुर में बिकने वाली ज्वैलरी की)

 

हद तो तब... ज्वैलर नहीं ले रहे शुद्धता की गारंटी

कोयम्बटूर ज्वैलरी एसो. ने हाल ही कोर्ट में याचिका में कहा है कि शुद्धता की जवाबदेही हॉलमार्क सेंटर्स की होनी चाहिए। इसी आधार पर उन्हें उस नियम के खिलाफ स्टे मिला, जिसमें जिम्मेदारी ज्वैलर्स पर थी।

 

सेंटरों की ही है जिम्मेदारी

सोने में शुद्धता की जिम्मेदारी हॉलमार्किंग सेंटर्स की है। गड़बड़ियां वहीं हो रही हैं। -कैलाश मितल, अध्यक्ष, जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी

 

शिकायत नहीं मिलती
कुछ सेंटर बिना जांचे हॉलमार्किंग कर रहे हैं, पर उपभोक्ताओं से शिकायत नहीं मिलती। -ए. के सिन्हा, निदेशक,

बीआईएस, जयपुर

शुद्धता का यह है सच- 22 कैरेट में मिलनी चाहिए 91.3% शुद्धता, मिल रही 88%

राजस्‍थान की बात करें तो राज्‍य के आभूषण विक्रेता हर दिन औसतन 200 किलो सोने के आभूषण बेचते हैं। इनमें से लगभग बीस फीसदी यानी 40 किलो हाॅलमार्क ज्वैलरी होती है। आभूषण विक्रेताओं से बातचीत के आधार पर 22 कैरेट  हाॅलमार्क ज्वैलरी में सोने की शुद्धता 91.6% होनी चाहिए। लेकिन यह औसतन 88% ही बैठती है। ग्राहक को हर दस ग्राम आभूषणों की खरीद पर चार फीसदी यानी मौजूदा कीमतों पर 1,000 रु. का नुकसान होता है। ऐसेे में 40 किलो हाॅलमार्क ज्वैलरी की खरीद पर ग्राहकों को रोज 40 लाख रुपए की चपत लग रही है। इसके लिए बीआईएस और हालमार्क सेंटर जिम्मेदार है।

 

5 निशान देखकर खरीदें ज्वैलरी
1.    बीआईएस का त्रिकोण वाला लोगो।
2.    कैरेट का नंबर। यह प्रतिशत में लिखी होगी। उदाहरण के तौर पर-23 कैरेट ज्वैलरी पर लिखा होगा 958 यानी 95.8 फीसदी शुद्धता।
3.    हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो।
4. जिस साल ज्वैलरी बनी उसका कोड।
5. ज्वैलरी शॉप का नाम।

http://m.bhaskar.com/news/referer/521/RAJ-JAI-sting-operation-of-fraud-in-gold-jewelry-4826333-PHO.html?pg=2

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

Kuchh vaastu tips

🔴🔴🔴🔴
💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवश्य
 लगाएं ।

💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |

💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं।

💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।

💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |

💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |

💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |

💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं |

💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |

💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |

💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |

💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |

💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |

💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |