शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

नई नवेली दुल्हन

* नई नवेली दुल्हन *

* :-  नई नवेली दुल्हन जब ससुराल में आई तो

* उसकी सास बोली :-
बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है।

* बहू ने पूछा :-
सासु माँ एक तो 'माँ' जिसने मुझे जन्म दिया और एक 'आप' हो और कौन सी माँ है ?

सास बडी खुश हुई कि मेरी बहू तो बहुत सीधी है।

* सास ने कहा :-
बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है! सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे।

सुबह दोनों एक साथ मन्दिर जाती है।

.....आगे सास पिछे बहू।

* जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर कहा :-
माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है, मैं बाल्टी लाती हूँ, और दूध निकालते है।

सास ने अपने सिर पर हाथ पिटा कि बहू तो "पागल" है और

* बोली :-
बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नहीं दे सकती।

चलो आगे।

* मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी।

* फिर बहू ने कहा :-
माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा।

* सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया।

और

* बोली :-
बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ?

चलो अंदर चलो मन्दिर में, और

* सास बोली :-
बेटा ये माता है,और इससे मांग लो, यह माता तुम्हारी मांग पूरी करेंगी ।

* बहू ने कहा :-
माँ ये मूर्ति तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है ? जब पत्थर की गाय दूध नहीं दे सकती ?
पत्थर का बछड़ा दूध पी नहीं सकता ?
पत्थर का शेर खा नहीं सकता ?
तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ?

"अगर कोई दे सकती हैं तो वो आप है"

" आप मुझे आशीर्वाद दीजिये "

तभी सास की आँखे खुली वो बहू पढ़ी लिखी थी,

तार्किक थी, जागरूक थी, तर्क और विवेक के सहारे बहु ने सास को जाग्रत कर दिया !

अगर मानवता की प्राप्ति करनी है, तो पहले असहायों, जरुरतमंदों, और गरीबो की सेवा करो
परिवार, समाज में लोगो की मदद करे ।

"अंधविश्वास और पाखण्ड को हटाना ही मानव सेवा है"

"मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया"

--- *यह संसार की रीत है*--

1. चूहा अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (गणेश की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।

2. सांप अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर का कंठहार मानकर)

लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता है, और जब तक मार न दे, चैन नही लेता।

3. बैल अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है।

4. कुत्ता अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (भैरुनाथ की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।

5. शेर अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (दुर्गा की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है।

* हे मानव :-

"पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यो ?"     


      

परमेश्वर माली

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