मंगलवार, 9 सितंबर 2025

❓क्या आपको पता है....❓

❓क्या आपको पता है....❓

      😡क्रोध का पूरा खानदान है..😡

 क्रोध की एक लाडली बहन है
             II ज़िद ॥

         क्रोध की पत्नी है
             ॥ हिंसा II

      क्रोध का बडा भाई है
            ॥ अंहकार ॥

क्रोध का बाप जिससे वह डरता है
                ॥ भय ॥

          क्रोध की बेटिया हैं
        ॥ निंदा और चुगली ॥

           क्रोध का बेटा है
                ॥ बैर ॥

  इस खानदान की नकचडी बहू है
                 ॥ ईर्ष्या॥

             क्रोध की पोती है
                 ॥ घृणा ॥

               क्रोध की मां है 
                ॥ उपेक्षा ॥

         और क्रोध का दादा है                        
                 ।। द्वेष ।।
   
    तो इस खानदान से हमेशा 
  दूर रहें और हमेशा खुश रहो।
इस मेसज को आगे भेजकर सबको   
 इस खानदान के बारे जानकारी दे।
              🙏धन्यवाद 🙏
     |||||||| "ये ही सत्य हैं" |||||

 Qus→   जीवन का उद्देश्य क्या है ?
Ans→  जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है - जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है..!!

Qus→  जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ? 
Ans→  जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया - वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है..!!

Qus→  संसार में दुःख क्यों है ?
Ans→  लालच, स्वार्थ और भय ही संसार के दुःख का मुख्य कारण हैं..!!

Qus→  ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की ?
Ans→  ईश्वर ने संसारकी रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की..!!

Qus→  क्या ईश्वर है ? कौन है वे ? क्या रुप है उनका ? क्या वह स्त्री है या पुरुष ?
 Ans→   कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वे भी है - उस महान कारण को ही आध्यात्म में 'ईश्वर' कहा गया है। वह न स्त्री है और ना ही पुरुष..!!

Qus→   भाग्य क्या है ?
Ans→  हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है तथा आज का प्रयत्न ही कल का भाग्य है..!!

Qus→   इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ? 
Ans→   रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं और उसे सभी देखते भी हैं, फिर भी सभी को अनंत-काल तक जीते रहने की इच्छा होती है..इससे बड़ा आश्चर्य ओर क्या हो सकता है..!!

Qus→   किस चीज को गंवाकर मनुष्यधनी बनता है ?
Ans→   लोभ..!!

Qus→   कौन सा एकमात्र उपाय है जिससे जीवन सुखी हो जाता है? 
Ans →   अच्छा स्वभाव ही सुखी होने का उपाय है..!!

Qus →   किस चीज़ के खो जानेपर दुःख नहीं होता ?
Ans →   क्रोध..!!

Qus→   धर्म से बढ़कर संसार में और क्या है ?
Ans →   दया..!!

Qus→   क्या चीज़ दुसरो को नहीं देनी चाहिए ?
Ans→   तकलीफें, धोखा..!!

Qus→   क्या चीज़ है, जो दूसरों से कभी भी नहीं लेनी चाहिए ?
Ans→   इज़्ज़त, किसी की हाय..!!  

Qus→   ऐसी चीज़ जो जीवों से सब कुछ करवा सकती है?
Ans→   मज़बूरी..!!🌸

Qus→   दुनियां की अपराजित चीज़ ?
Ans→  सत्य..!!

Qus→ दुनियां में सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ ? Ans→   झूठ..!!💜

Qus→   करने लायक सुकून काकार्य ?
Ans→ परोपकार..!!🌸

Qus→   दुनियां की सबसे बुरी लत ?
Ans→ मोह..!!💝

Qus→   दुनियां का स्वर्णिम स्वप्न ?
Ans→   जिंदगी..!!🍀

Qus→   दुनियां की अपरिवर्तनशील चीज़ ?
Ans→   मौत..!!💜

Qus→   ऐसी चीज़ जो स्वयं के भी समझ ना आये ?
Ans→   अपनी मूर्खता..!!🌸

Qus→   दुनियां में कभी भी नष्ट/ नश्वर न होने वाली चीज़ ?
Ans→   आत्मा और ज्ञान..!!💝

Qus→   कभी न थमने वाली चीज़ ?
Ans→   समय..

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

नई नवेली दुल्हन

* नई नवेली दुल्हन *

* :-  नई नवेली दुल्हन जब ससुराल में आई तो

* उसकी सास बोली :-
बींदणी कल माता के मन्दिर में चलना है।

* बहू ने पूछा :-
सासु माँ एक तो 'माँ' जिसने मुझे जन्म दिया और एक 'आप' हो और कौन सी माँ है ?

सास बडी खुश हुई कि मेरी बहू तो बहुत सीधी है।

* सास ने कहा :-
बेटा पास के मन्दिर में दुर्गा माता है! सब औरतें जायेंगी हम भी चलेंगे।

सुबह दोनों एक साथ मन्दिर जाती है।

.....आगे सास पिछे बहू।

* जैसे ही मन्दिर आया तो बहू ने मन्दिर में गाय की मूर्ति को देखकर कहा :-
माँ जी देखो ये गाय का बछड़ा दूध पी रहा है, मैं बाल्टी लाती हूँ, और दूध निकालते है।

सास ने अपने सिर पर हाथ पिटा कि बहू तो "पागल" है और

* बोली :-
बेटा ये स्टेच्यू है और ये दूध नहीं दे सकती।

चलो आगे।

* मन्दिर में जैसे ही प्रवेश किया तो एक शेर की मूर्ति दिखाई दी।

* फिर बहू ने कहा :-
माँ आगे मत जाओ ये शेर खा जायेगा।

* सास को चिंता हुई की मेरे बेटे का तो भाग्य फूट गया।

और

* बोली :-
बेटा पत्थर का शेर कैसे खायेगा ?

चलो अंदर चलो मन्दिर में, और

* सास बोली :-
बेटा ये माता है,और इससे मांग लो, यह माता तुम्हारी मांग पूरी करेंगी ।

* बहू ने कहा :-
माँ ये मूर्ति तो पत्थर की है ये क्या दे सकती है ? जब पत्थर की गाय दूध नहीं दे सकती ?
पत्थर का बछड़ा दूध पी नहीं सकता ?
पत्थर का शेर खा नहीं सकता ?
तो ये पत्थर की मूर्ति क्या दे सकती है ?

"अगर कोई दे सकती हैं तो वो आप है"

" आप मुझे आशीर्वाद दीजिये "

तभी सास की आँखे खुली वो बहू पढ़ी लिखी थी,

तार्किक थी, जागरूक थी, तर्क और विवेक के सहारे बहु ने सास को जाग्रत कर दिया !

अगर मानवता की प्राप्ति करनी है, तो पहले असहायों, जरुरतमंदों, और गरीबो की सेवा करो
परिवार, समाज में लोगो की मदद करे ।

"अंधविश्वास और पाखण्ड को हटाना ही मानव सेवा है"

"मानव का सफर पत्थर से शुरु हुआ था। पत्थरों को ही महत्व देता है और आज पत्थर ही बन कर रह गया"

--- *यह संसार की रीत है*--

1. चूहा अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (गणेश की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित चूहा दिख जाये तो पिंजरा लगाता है और चूहा मार दवा खरीदता है।

2. सांप अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर का कंठहार मानकर)

लेकिन जीवित सांप दिख जाये तो लाठी लेकर मारता है, और जब तक मार न दे, चैन नही लेता।

3. बैल अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (शंकर की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित बैल(सांड) दिख जाये तो उससे बचकर चलता है।

4. कुत्ता अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (भैरुनाथ की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित कुत्ता दिख जाये तो 'भाग कुत्ते' कहकर अपमान करता है।

5. शेर अगर "पत्थर" का तो उसको पूजता है। (दुर्गा की सवारी मानकर)

लेकिन जीवित शेर दिख जाये तो जान बचाकर भाग खड़ा होता है।

* हे मानव :-

"पत्थर से इतना लगाव क्यों और जीवित से इतनी नफरत क्यो ?"     


      

परमेश्वर माली

गौर से दो बार पढ़े✌

गौर से दो बार पढ़े
*    जिस दिन हमारी मौत होती है, हमारा पैसा बैंक में ही रहा जाता है।
*    जब हम जिंदा होते हैं तो हमें लगता है कि हमारे पास खर्च करने को पर्याप्त धन नहीं है।
*   जब हम चले जाते है तब भी बहुत सा धन बिना खर्च हुये बच जाता है।
*   एक चीनी बादशाह की मौत हुई। वो अपनी विधवा के लिये बैंक में 1.9 मिलियन डॉलर छोड़ कर गया। विधवा ने जवान नौकर से शादी कर ली। उस नौकर ने कहा -
"मैं हमेशा सोचता था कि मैं अपने मालिक के लिये काम करता हूँ अब समझ आया कि वो हमेशा मैरे लिये काम करता था।"
             
                "सीख"
ज्यादा जरूरी है कि अधिक धन अर्जित करने के बजायें अधिक जिया जाये।
• अच्छे व स्वस्थ शरीर के लिये प्रयास करिये।
• मँहगे फ़ोन के 70% फंक्शन अनोपयोगी रहते है।
• मँहगी कार की 70% गति का उपयोग नहीं हो पाता।
• आलीशान मकानो का 70% हिस्सा खाली रहता है।
• पूरी अलमारी के 70% कपड़े पड़े रहते हैं।
• पुरी जिंदगी की कमाई का 70% दूसरो के उपयोग के लिये छूट जाता है।
   70% गुणो का उपयोग नहीं हो पाता तो!
    30% का पूर्ण उपयोग कैसे हो?
• स्वस्थ होने पर भी निरंतर चैक अप करायें।
• प्यासे न होने पर भी अधिक पानी पियें।
• जब भी संभव हो, अपना अहं त्यागें ।
• शक्तिशाली होने पर भी सरल रहैं।
• धनी न होने पर भी परिपूर्ण रहें।
                   और
          बेहतर जीवन जीयें !!!
             
काबू में रखें - प्रार्थना के वक़्त अपने दिल को,
काबू में रखें - खाना खाते समय पेट को,
काबू में रखें - किसी के घर जाएं तो आँखों को,
काबू में रखें - महफ़िल मे जाएं तो ज़बान को,
काबू में रखें - पराया धन देखें तो लालच को,
               
भूल जाएं - अपनी नेकियों को,
भूल जाएं - दूसरों की गलतियों को,
भूल जाएं - अतीत के कड़वे संस्मरणों को,
               
छोड दें - दूसरों को नीचा दिखाना,
छोड दें - दूसरों की सफलता से जलना,
छोड दें - दूसरों के धन की चाह रखना,
छोड दें - दूसरों की चुगली करना,
छोड दें - दूसरों की सफलता पर दुखी होना,
             
यदि आपके फ्रिज में खाना है,
बदन पर कपड़े हैं,
घर के ऊपर छत है और
सोने के लिये जगह है,
तो दुनिया के 75% लोगों से ज्यादा धनी हैं आप।
यदि आपके पर्स में पैसे हैं और आप कुछ बदलाव के लिये कही भी जा सकते हैं जहाँ आप जाना चाहते हैं तो आप दुनिया के 18% धनी लोगों में शामिल हैं।
यदि आप आज पूर्णतः स्वस्थ होकर जीवित हैं तो आप उन लाखों लोगों की तुलना में खुश नसीब हैं जो इस हफ्ते जी भी न पायें।
यदि आप मैसेज को वाकई पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं तो आप उन करोड़ों लोगों में खुश नसीब हैं जो देख नहीं सकते और पढ़ नहीं सकते।
जीवन के मायने दुःखों की शिकायत करने में नहीं हैं
बल्कि हमारे निर्माता को धन्यवाद करने के अन्य हजारों कारणों मे हैं।
धन्यवाद!


परमेश्वर माली

मानव जीवन में तीन बातें महत्वपूर्ण हैं!!


               समय, सम्बंध ओर दोस्ती ये वो खास तोहफे है जो हमें मिलते तो मुफ्त है पर जब ये कहीं खो जाते है तो इनकी कीमत का पता चलता है....  


तीन चीजों में मन लगाने से उन्नति होती है -
ईश्वर, परिश्रम और विद्या।
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√. तीन चीजों को कभी छोटी ना समझे - 
बिमारी, कर्जा और शत्रु।
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√. तीनों चीजों को हमेशा वश में रखो - 
मन, काम और लोभ।
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√. तीन चीज़ें निकलने पर वापिस नहीं आती - 
तीर कमान से, बात जुबान से और प्राण शरीर से।
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√. तीन चीज़ें कमज़ोर बना देती है - 
बदचलनी, क्रोध और लालच।
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√. तीन चीज़ें कोई चुरा नहीं सकता - 
अकल, चरित्र और हुनर।
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√. तीन व्यक्ति वक़्त पर पहचाने जाते हैं - 
स्त्री, भाई और दोस्त।
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√. तीनों व्यक्ति का सम्मान करो -
माता, पिता और गुरु।
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√. तीनों व्यक्ति पर सदा दया करो -
बालक, भूखे और पागल।
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√. तीन चीज़े कभी नहीं भूलनी चाहिए -
कर्ज़, मर्ज़ और फर्ज़।
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√. तीन बातें कभी मत भूलें -
उपकार, उपदेश और उदारता।
√. तीन चीज़े याद रखना ज़रुरी हैं -
सच्चाई, कर्तव्य और मृत्यु।
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√. तीन बातें चरित्र को गिरा देती हैं - 
चोरी, निंदा और झूठ।
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√. तीन चीज़ें हमेशा दिल में रखनी चाहिए -
नम्रता, दया और माफ़ी।
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√. तीन चीज़ों पर कब्ज़ा करो -
ज़बान, आदत और गुस्सा।
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√. तीन चीज़ों से दूर भागो -
आलस्य, खुशामद और बकवास।
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√. तीन चीज़ों के लिए मर मिटो -
धेर्य, देश और मित्र।
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√. तीन चीज़ें इंसान की अपनी होती हैं -
रूप, भाग्य और स्वभाव।
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√. तीन चीजों पर अभिमान मत करो –
धन, ताकत और सुन्दरता।
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√. तीन चीज़ें अगर चली गयी तो कभी वापस नहीं आती -
समय, शब्द और अवसर।
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√. तीन चीज़ें इन्सान कभी नहीं खो सकता -
शान्ति, आशा और ईमानदारी।
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√. तीन चीज़ें जो सबसे अमूल्य है -
प्यार, आत्मविश्वास और सच्चा मित्र।



अच्छे लोगों की इज्जत
  कभी कम नहीं होती।
सोने के सौ टुकड़े करो,
               फिर भी कीमत
                कम नहीं होती।
भूल होना "प्रकति " है,
मान लेना "संस्कृति" है,
सुधार लेना "प्रगति" है,




संग्रहण कर्ता- परमेश्वर दुगारिया (भोई राजमाली), गांव - बामनिया कलां, निवास स्थान - कुरज 

जूतो का सीधा संबंध


// जूतो का सीधा संबंध //
     जूतो का सीधा संबंध मंदिरो से है ! बहुत से लोग मंदिर जाते ही इसलिये हैं क्योकि वे अपने फिलहाल पहने जा रहे जूतों से बोर हो चुके है और अपने लिये नये जूते चाहते हैं ! और बहुत से लोग केवल इसलिए मंदिर नहीं जाते क्योकिं वे अपने जूतो से बहुत ज्यादा प्रेम करते है !

     जूते इसलिये भी चुराये जाते है क्योकि इसमें थ्रिल है ! जूते चुराना एक बहुत बडा आर्ट है ! बेहद सावधान ,चतुर ,दूरंदेश आदमी ही जूते चुरा सकता है ! किसी दूसरे के नये जूतो मे पैर डाल लेना ,ऐसा करते हुये देख लिये जाने पर अनजाने मे ऐसा कर जाने की एक्टिग करना हर किसी के बस की बात नही ! कला है ये और हर कलाकार की तरह जूते चुराने वालो को भी अपनी प्रतिभा को निखारने के लिये नियमित रूप से मंदिर जाना पडता है !

     मंदिर के पास किसी भक्त के उतारे नये जूतो को देखते ही अपने जूते पुराने लगने लगना स्वाभाविक सा ही है ! जूता चुराने वाला मान लेता है कि यह भगवान की इच्छा है कि वो आज नये जूते पहन कर घर जाये ! वह भगवान की बात टाल नही पाता और नये जूतो मे पाँव डाल लेता है !

     अब जूते हमे़शा जरूरत के लिये ही चोरी किये जाये ऐसा भी नही है ! जूते सामने पडे है ! जूते नये दिख रहे हैं ! लावारिस है ! जूते उतारने वाला लापरवाह है ! किसी को रखवाली के लिये छोड नही गया है ! अपने आपको ज्यादा चतुर समझता है ! हीरोगिरी झाड रहा है ! बडे बाप की औलाद है ! जूतो की कद्र नही करता ! इन सब वजहो से भी जूते चुराना जरूरी हो जाता है !

     सफलता पूर्वक जूता चुरा लेने मे खुशी है वह कोई बडी परीक्षा पास कर लेने या गोल्ड मैडल जीतने से कम नही होती ! जूता चुराने वाले सच्चे देशभक्त हैं ! वे केवल यह चाहते हैं कि आप नये जूते खरीदे ! आप नये जूते खरीदेगे ! अर्थव्यवस्था गति पकडेगी ! देश आगे बढेगा !

     भगवान भरोसे रहने वाला कोई भी आदमी कभी यह भरोसा नही कर पाता कि भगवान जी से मिलकर लौटने पर उसकी अपने प्रिय जूतों से फिर मुलाक़ात हो भी सकेगी या नही ,पर मंदिर जाने पर जूते तो उतारना ही पड़ते है ! वह भारी मन से उतारता है जूते ! वैसे ही निहारता है अपने जूतो को ,जिस तरह युद्ध पर जाता फ़ौजी मुडमुड कर अपना बीबी बच्चो को देखता है !

     मेरे ख़्याल से जूते ही ज़िम्मेदार है जीवन मरण के सिलसिले के ! ये ना होते तो हम लोग कब के तर गये होते ! होता ये है कि दर्शन करते वक़्त ये मन मे इस कदर घुसे रहते है कि उसमें भगवान के रहने की जगह ही नही बचती ! भगवान के सामने हाथ जोड़े वक्त भी ध्यान भगवान के बजाय जूतों मे लगा रहता है ,चतुर भक्तगण पूरी कोशिश करते है कि उनके जूते उनके क़ाबू मे बने रहे ,वे आमतौर पर अपने जूते मंदिर के प्रवेश द्वार के एन सामने उतारते है ताकि भगवान और जूतों को एक साथ देखा जाना सँभव हो सके, पर्याप्त सावधान भी बने रहते है पर भगवान की ही वजह से एकाध सैकेंड की चूक हो ही जाती है और भाई लोग आपके जूते पहन जाते है ,जूता चुराने वाले किसी भक्त की तुलना मे अपने लक्ष्य के प्रति ज्यादा एकाग्र और समर्पित होते है ! आप नंगे पाँव घर लौटते हैं और लौटते वक्त पूरे टाईम यह सोच सोच कर कन्फ़्यूज होते रहते है कि भगवान आपके और जूता चोर मे से किसका ज्यादा सगा है !

     मंदिरों के जूता चोरों से अपने जूते बचाने के लिये श्रद्धालुओं द्वारा अनादि काल से तरह तरह से उपायों का अविष्कार किया जाता रहा है ,और इनमें से अपने दोनो पाँव के जूतों को एक दूसरे से अलग अलग ,पर्याप्त दूरी पर रख कर मंदिर मे प्रवेश करने का तरीका सर्वाधिक लोकप्रिय उपाय माना गया है ,मै खुद इस उपाय को आज़मा कर अनेक बार अपने जूतों को वापस पाने मे सफल हो चुका हूँ , कुछ लोग मंदिर जाने के लिये फटे पुराने जूते इस्तेमाल करते है और बहुत बार यह तरीका भी कारगर होता है .जूता चोर आपकी ग़रीबी पर तरस खा कर आपको बख़्श देते है ,अपनी कार मे ही जूते उतार जाना भी अपने जूतों के साथ बने रहने के आजमाये हुये सफल तरीक़ों मे से एक है ! पर यदि आप बे कार है तो कार वाला फ़ार्मूला आपके लिये नही है !

     आप अपनी सुविधानुसार ऊपर लिखे इन तरीक़ों मे से किसी को भी आज़मा सकते है पर ये हमेशा काम करेंगे इसकी कोई गारंटी भगवान भी नही दे सकते !

     सच्ची बात तो यह है कि जूते होते ही चोरी हो जाने के लिये हैं ! जूतों को चोरी होना है तो वे होगें ही ,मेरा यह मानना है कि मंदिर में प्रवेश करते वक्त ही यह मान लेना चाहिये कि ये जूते मुझसे पहले किसी और के थे और मेरे बाद किसी और के होगें, इसीलिये इस क्या लाया है और क्या ले जायेगा के ज्ञान को मानने वाले सच्चे आराधक मंदिर मे भगवान के सामने होते वक्त जूतों को लेकर क़तई विचलित नही होते ,वे पूरी तन्मयता से भगवान का ध्यान करते है ,और मंदिर से बाहर निकलने पर यदि वे पाते है कि उनके जूते अन्तर्ध्यान हो चुके हैं तो वे उतनी ही तन्मयता से अन्य श्रध्दालुओं द्वारा उतारे गये जूतों के ढेर से ऐसे जूते तलाश करते है जो उनके अपने चोरी जा चुके जूतों से अधिक बेहतर और नये से हों ,वे उन्हे निसंकोच पहनते हैं और भगवान का आभारी होते हुये सकुशल घर लौट आते हैं ,मंदिर से जूते पहन कर लौटने का यह सर्वाधिक कारगर और लोकप्रिय तरीका है ,और मै खुद इसी उपाय पर भरोसा करता हूँ और मंदिर से दसियो बार जूते चोरी होने के बावजूद इसी उपाय की कृपा से कभी नंगे पाँव घर नही लौटा ,और जूते भी हमेशा नये के नये ही बने रहे ! चूँकि आप भी समझदार है इसलिये मुझे पूरा विश्वास है कि भविष्य मे जब भी ऐसा मौका आयेगा आप भी मंदिर से लौटते वक्त बेहतर जूतों के साथ ही घर लौटेंगे !


//परमेश्वर दुगारिया//गांव- बामनिया कलां//निवास स्थान - कुरज//

गाय व भैंस के दूध में अंतर

गाय व भैंस के दूध में अंतर

*गाय व भैंस के दूध में अंतर*
जो बहुत कम लोग जानते हैं !

◆भैंस अपने बच्चे से पीठ फेर कर बैठती है चाहे उसके बच्चे को कुत्ते खा जायें वह नहीं बचायेगी, 

◆जबकि गाय के बच्चे के पास अनजान आदमी तो क्या शेर भी आ जाये तो जान दे देगी, परन्तु जीते जी बच्चे पर आँच नही आने देगी। 
इसीलिए उसके दूध में स्नेह का गुण भरपूर होता है।

◆भैंस को गन्दगी पसन्द है, कीचड़ में लथपथ रहेगी,, 

◆पर गाय अपने गोबर पर भी नहीं बैठेगी उसे स्वच्छता प्रिय है।

◆भैंस को घर से 2 किमी दूर तालाब में छोड़कर आ जाओ वह घर नहीं आ सकती उसकी याददास्त जीरो है। 

◆गाय को घर से 5 किमी दूर छोड़ दो। 
वह घर का रास्ता जानती है,आ जायेगी। 
गाय के दूध में #स्मृति तेज है।

◆दस भैंसों को बाँधकर 20 फुट दूर से उनके बच्चों को छोड़ दो, एक भी बच्चा अपनी माँ को नहीं पहचान सकता, 

◆जबकि गौशालाओं में दिन भर गाय व बछड़े अलग-अलग शैड में रखते हैं, सायंकाल जब सबका माता से मिलन होता है तो सभी बच्चे (हजारों की स॔ख्या में) अपनी अपनी माँ को पहचान कर दूध पीते हैं, ये है गाय दूध की याददास्त।

◆जब भैंस का दूध निकालते हैं तो भैंस सारा दूध दे देती है, 

◆परन्तु  गाय थोड़ा-सा दूध ऊपर चढ़ा लेती है, और जब उसके बच्चे को छोड़ेंगे तो उस चढ़ाये दूध को उतार देती है। 
ये गुण माँ के हैं जो भैंस मे नहीं हैं।

◆गली में बच्चे खेल रहे हों और भैंस भागती आ जाये तो बच्चों पर पैर अवश्य रखेगी...

◆लेकिन गाय आ जाये तो कभी भी बच्चों पर पैर नही रखेगी।

◆भैंस धूप और गर्मी सहन नहीं कर सकती...

◆जबकि गाय मई जून में भी धूप में बैठ सकती है।

◆भैंस का दूध तामसिक होता है.... 
जबकि गाय का सात्विक। 

◆भैंस का दूध आलस्य भरा होता है, उसका बच्चा दिन भर ऐसे पड़ा रहेगा जैसेे भाँग खाकर पड़ा हो। 
◆जब दूध निकालने का समय होगा तो मालिक उसे उठायेगा...

◆परन्तु गाय का बछड़ा इतना उछलेगा कि आप रस्सा खोल नहीं पायेंगे।

◆फिर भी लोग भैंस खरीदने में लाखों रुपए खर्च करते हैं.... 
जबकि गौमाता का दूध अमृत समान होता है।।


*🙏जय गौमाता🙏*


संग्रहण कर्ता- परमेश्वर दुगारिया (भोई राजमाली), गांव-बामनिया कलां, निवास स्थान - कुरज