शनिवार, 13 जून 2015

जानिए पूरे घर से जुड़ी वास्तु टिप्स, ऐसे बनाएं 

अपने सपनों का आशियाना बनवाते समय हर कोई यही चाहता है कि उसके इस घर में सुख-समृद्धि बनी रहे, लेकिन कई बार ऐसा नहीं हो पाता। इसका कारण वास्तु दोष भी हो सकता है। इसलिए मकान बनवाते समय कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखा जाना आवश्यक होता है अन्यथा आगे जाकर कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।
आज हम आपको मकान के लगभग हर हिस्से से जुड़ी कुछ वास्तु टिप्स के बारे में बता रहे हैं। मकान बनाने की पहली प्रक्रिया भूखंड (प्लॉट) चयन से होती है। अगर आप वास्तु अनुरूप प्लॉट खरीदना चाहते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
सिद्धांत- प्लॉट पर भवन का निर्माण करवाते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसके केवल 60 प्रतिशत भाग पर ही निर्माण करवाएं यदि अधिक निर्मित भाग की आवश्यकता न हो तो इससे अधिक भाग भी खुला छोड़ा जा सकता है।
1. यदि कोने का प्लॉट हो तो सर्वश्रेष्ठ होगा।
2. आपका प्लॉट आस-पास के अन्य प्लॉटों या बस्ती से नीचे नहीं होना चाहिए। नहीं तो बरसात के दिनों में पानी आपके घर में घुस सकता है। साथ ही घर में हवा भी पर्याप्त नहीं आ सकेगी।
3. गंदा नाला, प्रदूषण वाली फैक्टरी, गंदगी, श्मशान, कब्रिस्तान अथवा मुर्दा-मवेशी निस्तारण आदि स्थानों के पास प्लॉट न लें।
4- प्लॉट के आस-पास जीर्ण-शीर्ण मकान, पुराना कुआं, क्षतिग्रस्त मंदिर या गड्ढा नहीं होना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने से वास्तु का आभामंडल प्रभावित होगा।
5- ऐसे प्लॉट का चयन करें जिसके उत्तर में आम रास्ता हो। इससे घर का प्रवेश द्वार उत्तर में रखा जा सकता है।
6- यदि आपके भूखंड के पूर्व की तरफ आम रास्ता निकलता हो तो भी बेहतर रहेगा। क्योंकि पूर्व दिशा से ही सूर्य निकलता है। ऐसे में पूर्व दिशा में घर का मुंह रखना शुभ व स्वास्थ्यवर्धक है।
7. संभव हो तो दक्षिणमुखी प्लॉट लेने से बचें।

कैसा हो आपके प्लॉट का साइज?
1. संभव हो तो चौकोर अथवा आयताकार प्लॉट खरीदें।
2. आदर्श प्लॉट की चौड़ाई तथा लंबाई का अनुपात 2:3 होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर- 40*60 वर्ग फुट का प्लॉट।
3. गौमुखी प्लॉट को सबसे शुभ माना जाता है। अर्थात ऐसा भूखंड जो सामने की तरफ से कम चौड़ा व पीछे से अधिक चौड़ा हो।
4. अगर उद्योग के लिए प्लॉट खरीद रहे हैं तो नाहरमुखी प्लॉट भी खरीद सकते हैं। अर्थात जिसकी आम रास्ते की तरफ वाली भुजा पीछे की भुजा से बड़ी हो।
5. प्लॉट के सामने पार्क हो या खुला स्थान हो तो बेहतर रहेगा।

घर में ऐसी होनी चाहिए पानी की व्यवस्था
घर बनवाते समय उसमें पानी की व्यवस्था के बारे में जरूर विचार करना चाहिए, क्योंकि यदि घर में समुचित पानी की व्यवस्था नहीं होगी तो इसके कारण आने वाले समय में परिवार के सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें-
1. बोरिंग, कुआं या भूमिगत वॉटर टैंक प्लॉट के उत्तरी ईशान या पूर्वी ईशान में ही बनवाएं। यदि संभव न हो तो उत्तर दिशा में भी बोरिंग आदि करवाया जा सकता है। अन्य दिशाओं में बोरिंग, कुआं आदि का निर्माण शुभ नहीं माना गया है।
2. बोरिंग मेन गेट, मुख्य द्वार के सामने न हो। चौक के बीच में, मकान की दीवार, बाथरूम, नाली या सैप्टिक टैंक के पास बोरिंग या कुआं नहीं होना चाहिए।
3. बोरिंग के लिए ऐसे स्थान का चयन करें, जहां आना-जाना कम हो तथा कीचड़ न हो। जहां से पानी सुगमता से टैंक में पहुंच जाए। साथ ही इन बातों का भी ध्यान रखें कि बिजली की लंबी लाइन न बिछानी पड़े।
4. अगर मकान के ऊपर पानी की टंकी बनवाना हो तो नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) उपयुक्त रहेगा।
5. सबसे अधिक गौर करने वाली बात है, भवन के समस्त जल का निष्कासन पूर्व, वायव्य (पश्चिम-उत्तर), उत्तर या ईशान(उत्तर-पूर्व) कोण में हो।

कैसी होनी चाहिए भवन की नींव?
मकान की नींव ही उसकी मजबूती का आधार होती है। नींव खुदवाते समय इन बातों पर गौर करें-
1. नींव ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) से खोदनी प्रारंभ करना चाहिए। फिर आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) व वायव्य कोण (पश्चिम-उत्तर) की तरफ नींव खोदनी चाहिए। इसके बाद आग्नेय से नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) व वायव्य से नैऋत्य की ओर खुदवाना चाहिए।
2. सर्वप्रथम नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) से आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) व नैऋत्य से वायव्य (पश्चिम-उत्तर) की तरफ नींव भरवाना चाहिए। उसके बाद आग्नेय (दक्षिण-पूर्व) से ईशान (उत्तर-पूर्व) की तरफ बढ़ते हुए नींव भरवानी चाहिए।
3. प्लींथ के ऊपर यदि दीवारों की मोटाई 25 इंच रखना चाहते हैं तो प्लींथ तक कम से कम दो फुट चौड़ी दीवार बनवानी चाहिए। यदि ऊपर केवल नौ इंच मोटी दीवारें बनवानी हों तो प्लींथ की दीवारों की मोटाई 15 से 18 इंच तक रखी जा सकती है। आपके प्लॉट की प्लींथ उसके आस-पास निर्मित भवनों से अधिक होना चाहिए। इससे हीन भावना आपके घर में प्रवेश नहीं करेगी।
4. यदि प्लॉट के आस-पास मकान नहीं भी बनें हो तो भी प्लींथ पर्याप्त ऊंची रखनी चाहिए ताकि भविष्य में भी आप हीन भावना से ग्रसित न हों।


कैसा हो आपका रसोई घर?
रसोई (किचन) घर का मह्त्वपूर्ण हिस्सा होती है। यहां अन्नपूर्णा मां का वास भी माना जाता है। रसोई का निर्माण करवाते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें-
1. रसोई घर आग्नेय कोण (पूर्व-दक्षिण) में बनवाना चाहिए। यदि आग्नेय कोण में संभव न हो तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) में भी बनवाई जा सकती है। रसोई के लिए नैऋत्य कोण (पश्चिम-दक्षिण) कम फलदायक होता है, जबकि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रसोई न हीं बनवाएं तो अच्छा है।
2. रसोई घर आग्नेय कोण में बनवाने के पीछे प्राकृतिक कारण भी है। चूंकि हवा प्राय: वायव्य कोण से आग्नेय कोण की ओर चलती है। इसलिए वास्तु शास्त्र में अग्नि यंत्र आदि के लिए आग्नेय कोण को सर्वश्रेष्ठ माना है। इसके पीछे तर्क है कि रसोई घर में फैलने वाली गंध, धुआं व गर्मी घर से बाहर नहीं निकलेगी तो पूरे मकान का वातावरण अशुद्ध हो जाएगा। यदि हवा वायव्य कोण से आग्नेय कोण की ओर बहेगी तो रसोई की सारी गंदगी, बदबू व गर्मी खिड़की के रास्ते घर से निकल जाएगी।
3. रसोई घर न अधिक बड़ा हो न अधिक छोटा। सामान्य आकार (50 वर्ग फुट) का रसोई घर होना चाहिए।
4. वर्तमान में कलात्मक रसोई घर बनवाने का प्रचलन है। इसलिए रसोई घर चार कोण, षटकोण या अष्टकोण का हो सकता है।
5. रसोई में एक खिड़की ऐसी बनवाएं, जो पूर्व दिशा को ओर खुले ताकि सूर्य की प्रात:कालीन किरणें रसोई घर में प्रवेश कर विषैले कीटाणुओं से मुक्त कर दे तथा नमी, सीलन आदि को भी समाप्त कर दे।



कैसा हो डाइनिंग रूम?
वर्तमान समय में डाइनिंग हॉल का चलन बढ़ गया है। पहले भी भोजन कक्ष होते थे किंतु उनका आकार-प्रकार अलग ही होता था। घर में डाइनिंग हॉल होना संपन्नता की निशानी है। डाइनिंग हॉल बनवाते समय इन बातों का ध्यान रखें-
1. जहां तक संभव हो भोजन कक्ष (डाइनिंग रूम) भवन के पश्चिम अथवा पूर्व में बनवाना चाहिए।
2. भोजन कक्ष के ठीक सामने मुख्य द्वार या शौचालय न हो।
3. भोजन पकाने और भोजन करने में दो विपरीत उर्जाएं काम में आती हैं। इसलिए बेहतर है कि भोजन कक्ष, रसोई घर से अलग ही हो।
4. भोजन कक्ष का फर्श घर के अन्य कमरों के फर्श से नीचा न हो। यदि संभव हो तो रसोई व भोजन कक्ष के फर्श को भवन के शेष फर्श से थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है। इससे हीन भावना नहीं आएगी। जहां तक संभव हो डाइनिंग टेबल आयताकार ही हो।
5. टाण्ड या अलमारी के नीचे बैठकर भोजन नहीं करें। इससे मानसिक दबाव बनेगा, जिसका असर पाचन क्रिया पर पड़ेगा। भोजन कक्ष में हवा व प्रकाश का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए।

ऐसी होना चाहिए कमरों की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई
कमरों की संख्या में भले ही समझौता कर लें, किंतु कमरों की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई में कभी समझौता नहीं करें। जानिए कैसी होना चाहिए कमरों की लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई-
1. कमरे की ऊंचाई, चौड़ाई के बराबर या इससे अधिक ही होनी चाहिए। यदि इस सिद्धांत का पालन किया जाए तो वास्तु शास्त्र के अधिकांश नियमों की पालन स्वत: ही हो जाता है।
2. लिविंग रूम हवादार, प्रकाश युक्त व शीतलता देना वाला तभी हो सकता है, जब उसकी लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई पर्याप्त हो। लिविंग रूम की ऊंचाई 11 फुट से कम नहीं होनी चाहिए।
3. बाथरूम, स्टोर रूम आदि के ऊपर दुछत्ती डलवाते हुए छोटी साइज के स्टोर रूम बनवा सकते हैं। इन दुछत्तियों की ऊंचाई चार फुट से कम न रखी जाए ताकि सामान रखने व उतारने में आसानी रहे।
4. वर्तमान में आर.सी.सी की छत का चलन है। आर.सी.सी. के पिलर (कॉलम) बनते हैं। आर.सी.सी. के ही बीम डाले जाते हैं। इसलिए लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई अपनी मर्जी के अनुसार रखी जा सकती है।

कैसा हो घर का पूजा स्थल या मंदिर?
घर में पूजा स्थल होने से मन को शांति मिलती है और अगर यह वास्तु सम्मत हो तो और भी शुभ फल देता है।
1. घर में पूजा स्थल होना शुभता का परिचायक है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर की पवित्रता भी बनी रहती है। वहीं अगरबत्ती आदि के धुएं से वातावरण सुगंधित रहता है। विषाणु व कीटाणु घर में प्रवेश नहीं करते।
2. पूजा स्थल पूर्वी या उत्तरी ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में होना चाहिए। पूजा करने वाले का मुंह पश्चिम में हो तो अति शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व की ओर होना चाहिए।
3. शौचालय तथा पूजा घर पास-पास नहीं होना चाहिए। पूजा स्थल के समक्ष थोड़ा स्थान खुला होना चाहिए जहां आसानी से बैठा जा सके।
4. पूजा स्थल के नीचे कोई भी अग्नि संबंधी वस्तु जैसे- इन्वर्टर या विद्युत मोटर नहीं होना चाहिए। इस स्थान का उपयोग पूजन सामग्री, धार्मिक पुस्तकें, शुभ वस्तुएं रखने में किया जाना चाहिए।
5. पूजन में मूर्तियां अधिक न रखें। इस बात का विशेष ध्यान रहे कि गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती की मूर्तियां खड़ी स्थिति में न हो।
6. पूजा स्थल का उपयोग ध्यान, संध्या या योग के लिए भी किया जा सकता है। इस स्थान को शांत रखें। धीमी रोशनी वाले बल्ब लगाएं। अंधेरा व सीलन न हो। जब भी आपका मन अशांत हो, यहां आकर आप नई ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

कैसी हो विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था?
घर चाहे बड़ा हो या छोटा, कच्चा हो या पक्का, गांव में हो या शहर में बिजली कनेक्शन आवश्यक है। अब तो बिजली हमारी जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुकी है। जानिए घर बनवाते समय विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था किस प्रकार की होनी चाहिए-
1. वास्तु शास्त्र के अनुसार बिजली का मीटर, जनरेटर, इनवर्टर आदि घर के आग्नेय कोण में ही स्थापित करवाने चाहिए। ऐसा करना संभव नहीं हो तो वायव्य कोण में भी लगाए जा सकते हैं।
2. आपके घर का प्रवेश द्वार जिस दिशा में हो, सामान्यत: बिजली का मीटर भी उसी दिशा में लगाया जाता है। वैसे अपनी सुविधानुसार मीटर बोर्ड आदि लगवा सकते हैं। प्रत्येक कमरे में प्रवेश करते समय दाईं तरफ स्विच बोर्ड लगवाने चाहिए।
3. बिजली फिटिंग हेतु निर्माण कार्यों के साथ-साथ ही आवश्यक कार्य करवाते रहें ताकि बाद में तोड़-फोड़ व खुदाई न करवानी पड़े।

घर में नहीं होना चाहिए तहखाना
बेसमेंट (तलघर या तहखाना) सभी घरों में नहीं बनवाया जाता। कुछ लोग ही इसे बनवाते हैं। यह सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही बनवाया जाता है। वास्तु के अनुसार घर में तहखाना होना ही नहीं चाहिए। यदि बनवाना आवश्यक हो तो नीचे लिखी बातों का ध्यान अवश्य रखें-
1. जहां तक हो सके घर में तहखाना बनाने से बचें, क्योंकि तहखाना अंधकार का सूचक है जो घर में प्रवेश करने वाली ऊर्जा का क्षय करता है। 2. तहखाना न बनवाने के पीछे एक तर्क यह भी है कि उससे संबंधित आशंकाओं का आपकी दिनचर्या पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा नींद भी पूरी नहीं होती।
3. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) तहखाना बनवाने के लिए उपयुक्त है।
4. व्यवसायिक भवनों/दुकानों के नीचे बेसमेंट की उपयोगिता है। इसलिए अवश्य बनवाना चाहिए।
5. आवासीय भवनों में यदि बेसमेंट बनवाएं तो वास्तु सम्मत हो इस बात का विशेष ध्यान रखें। बेसमेंट का आकार चूल्हे जैसा न हो।

कैसा हो आपका बेडरूम?
मनुष्य अपने जीवन का एक-तिहाई हिस्सा सोने में गुजारता है और यदि औसतन आयु 70 वर्ष मान लें तो सोने में बीतने वाला कुल समय 23 साल से अधिक होगा। यह तथ्य बेडरूम को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है, क्योंकि बेडरूम की ऊर्जा हमें दिनभर प्रभावित करती है। यदि ऊर्जा का प्रवाह ठीक तरह से नहीं हो रहा हो तो नतीजतन हमारी शारीरिक ऊर्जा को नुकसान पहुंचेगा। इससे दु:स्वप्न, अनिद्रा और गहरी उदासी जैसी अनेक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। शयनकक्ष की सबसे अच्छी स्थिति घर के दक्षिण-पश्चिम में होती है, क्योंकि इसका संबंध पृथ्वी तत्व से होता है, जो स्थिर और निष्क्रिय है।
यह नींद के लिए सबसे शांतिपूर्ण और आरामदायक स्थितियां प्रदान करता है। यदि दक्षिण-पश्चिम का कमरा बेडरूम के तौर पर नहीं बनाया जा सकता हो तो घर के पश्चिम या दक्षिण की तरफ में से किसी एक ओर का कमरा बेडरूम के तौर पर नहीं बनाया जा सकता हो तो घर के पश्चिम या दक्षिण की तरफ में से किसी एक ओर को चुनना चाहिए। यदि आपका मकान बहुमंजिला हो तो बेडरूम भूतल पर नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि यहां ऐसा लगेगा जैसे कोई आपकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है। बड़े कमरों में से किसी एक कमरे को बेडरूम बनाना चाहिए।

मंगलवार, 9 जून 2015

जानिए वास्तु के उपयोगी नियम :-

इस लेख के माध्यम से आप भी अपने घर में वास्तु के नियमों का पालन करके सुख शान्ति और समृद्धि माहैल प्राप्त कर सकते है। इसके लिए जानिए वास्तु के कुछ साधारण टिप्स – कौशल
पाण्डेय गृह निर्माण में यदि हम वास्तु नियमों का ध्यान रखेंगे तो परेशानियों का घर में जल्दी से आगमन नहीं होता है । सर्व प्रथम वास्तु संबंधी नियमों की दिशाओं का ज्ञान, उनके अधिपति, ग्रह तथा दिशाओं से संबंधित तत्वों का ज्ञान होना अति आवश्यक है। इसे और अच्छी तरह से इस
प्रकार समझा जा सकता है।
उत्तर-पूर्व को ईशान कोण, उत्तर-पश्चिम को वायव्य कोण, दक्षिण-पूर्व को आग्नेय कोण एवं दक्षिण-पश्चिम को नैत्य कोण कहते हैं।
इन दिशाओं से संबंधित तत्व इस प्रकार हैं- उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) जल तत्व उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) वायु तत्व दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) अग्नि तत्व दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) पृथ्वी तत्व ब्रह्म स्थान (मध्य स्थान) आकाश तत्व जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश, पंच महाभूत तत्व कहे
जाते हैं। जिनसे मिलकर हमारा शरीर बना है।
इन पंचमहाभूतों से संबंधित ग्रह निम्नलिखित हैं- पृथ्वी – मंगल
जल – शुक्र अग्नि – सूर्य वायु – शनि आकाश – शनि साथ
ही चार अन्य ग्रहों (चंद्रमा, बुध, राहु और केतु) का संबंध,
क्रमशः मन, बुध, अहंकार एवं मोक्ष से है।
वास्तु के इस प्रारंभिक ज्ञान के बाद ‘अष्टदिशा वास्तु’ का
ज्ञान होना भी जन साधारण के लिए अतिआवश्यक है- इस
प्रकार दिशाओं के अनुरूप गृह निर्माण करवाने से घर में वास्तु
दोष होने का कोई कारण नजर नहीं आता, फिर भी शहरों में
स्थानाभाव के कारण छोटे-छोटे भूखंडों पर घर बनाने पड़ते हैं
साथ ही शहरों में अधिक संखया में लोग फ्लैट्स में ही रहते हैं
जो पहले से ही निर्मित होते हैं अतः घर पूर्णतया वास्तु सम्मत
हो, ऐसा संभव नहीं हो पाता। चाहकर भी हम उन वास्तु
दोषों को दूर नहीं कर पाते हैं और हमें उसी प्रकार उन वास्तु
दोषों को स्वीकार करते हुए अपने घर में रहना पड़ता है। ऐसी
परिस्थितियों में कुछ उपयोगी वास्तु टिप्स को अपनाकर गृह
दोषों को काफी सीमा तक कम किया जा सकता है।
यह महत्वपूर्ण जानकारियां निम्नलिखित हैं-
सर्वप्रथम घर के मुखय द्वार पर दृष्टि डालते हैं घर का मुखय
द्वार सदैव पूर्व या उत्तर में ही होना चाहिए किंतु यदि ऐसा
न हो पा रहा हो तो घर के मुखय द्वार पर ‘स्वास्तिक’ की
प्राण प्रतिष्ठा करवाकर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का
नाश और सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है।
घर की स्थिति अनुकूल होने लगती है।
घर के मुखय द्वार पर तुलसी का पौधा रखें। सुबह उसमें जल
अर्पित करें तथा शाम को दीपक जलाएं। पूर्व या उत्तर दिशा
में तुलसी का पौधा लगाने से घर के सदस्यों में आत्मविश्वास
बढ़ता है।
घर की छत पर तुलसी का पौधा रखने से घर पर बिजली गिरने
का भय नहीं रहता। घर में किसी प्रकार के वास्तु दोष से बचने
के लिए घर में पांच तुलसी के पौधे लगाएं तथा उनकी नियमित
सेवा करें।
ध्यान रहे कि घर में खिड़की दरवाजों की संखया सम हो जैसे
(2, 4, 6, 8, 10) तथा दरवाजे खिड़कियां अंदर की तरफ ही
खुलें।
द्वार खुलते-बंद होते समय किसी भी प्रकार की कर्कश ध्वनि
नहीं आनी चाहिए। ये अशुभ सूचक होता है।
यदि किसी भिक्षुक को भिक्षा देनी हो तो घर से बाहर
आकर ही दें, अन्यथा अनहोनी होने की संभावना रहती है।
कलह से बचने के लिए घर में किसी देवी-देवता की एक से
अधिक मूर्ति या तस्वीर न रखें। किसी भी देवता की दो
तस्वीरें इस प्रकार न लगाएं कि उनका मुंह आमने-सामने हो।
देवी-देवताओं के चित्र कभी भी नैत्य कोण में नहीं लगाने
चाहिए अन्यथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में उलझने की पूरी
संभावना रहती है।
किसी को कोई बात समझाते समय अपना मुंह पूर्व दिशा में
ही रखें। पढ़ते समय बच्चों का मुंह पूर्व दिशा में ही होना
चाहिए। चलते समय कभी भी पैर घसीटकर न चलें।
जीवन में स्थायित्व लाने के लिए सदैव अपने पैन से ही
हस्ताक्षर करें। इस बात का ध्यान रहे कि घर में कभी भी
फालतू सामान, टूटे-फूटे फर्नीचर, कूड़ा कबाड़ तथा बिजली
का सामान इकट्ठा न होने पाए। अन्यथा घर में बेवजह का
तनाव बना रहेगा। फटे-पुराने जूते-मौजे, छाते, अण्डर गारमेंट्स
आदि जितनी जल्दी हो सके घर से बाहर फैंक दें। नहीं तो घर में
सकारात्मक ऊर्जा का सर्वथा अभाव रहेगा और व्यर्थ की
परेशानियां घेरे रहेंगी।
फटे जूते मौजे और अण्डर गारमेंट्स प्रयोग में आने से शनि के
नकारात्मक पभ््र ााव भी झले ने पडत़े हैं।
धन वृद्धि के लिए तिजोरी का मुंह सदैव उत्तर या पूर्व दिशा
में ही होना चाहिए तथा जहां पर पैसे रखने हों वहां पर
सुगंधित दृव्य या इत्र, परफ्यूम आदि नहीं रखने चाहिए।
तिजोरी के दरवाजे पर कमल पर बैठी हुई तथा सफेद हाथियों
के झुन्ड के अग्र भाग से नहलाई जाती हुई लक्ष्मी जी की एक
तस्वीर लगाने से घर में निरंतर वृद्धि होती है।
दक्षिण की दीवार पर दर्पण कभी भी न लगाएं। दर्पण हमेशा
पूर्व या उत्तर की दीवार पर ही लगाना चाहिए। फ्लोरिंग,
दीवार या छत आदि पर दरारे नहीं पड़नी चाहिए। यदि ऐसा
है तो उन्हें शीघ्र ही भरवा देना चाहिए। घर के किसी भी
कोने में सीलन नहीं होनी चाहिए और न ही घर के किसी
कोने में रात को अंधेरा रहना चाहिए। शाम को कम से कम 15
मिनट पूरे घर की लाइट अवश्य जलानी चाहिए।
बिजली के स्विच, मोटर, मेन मीटर, टी.वी., कम्प्यूटर आदि
आग्नेय कोण में ही होने चाहिए इससे आर्थिक लाभ सुगमता से
होता है। घर में पुस्तकें रखने का स्थान उत्तर या पूर्व में ही
होना चाहिए तथा पुस्तकों को बंद अलमारी में ही रखना
चाहिए। टेलीफोन के पास कभी भी पानी का ग्लास या
चाय का कप नहीं रखना चाहिए। अन्यथा टेलीफोन ठीक से
काम नहीं करेगा और उसमें कुछ न कुछ गड़बड़ होती रहेगी। घर में
कभी भी मकड़ी के जाले नहीं लगने चाहिए नहीं तो राहु
खराब होता है तथा राहु के बुरे फल भोगने पड़ते हैं।
घर में कभी भी महाभारत, युद्ध, उल्लू आदि की तस्वीर नहीं
लगानी चाहिए। केवल शांत और सौम्य चित्रों से ही घर की
सजावट करनी चाहिए। अविवाहित कन्याओं के कमरे में सफेद
चांद का चित्र अवश्य लगाना चाहिए।
पूर्व की ओर मुख करके खाना खाने से आयु बढ़ती है। उत्तर की
ओर मुख करके भोजन करने से आयु तथा धन की प्राप्ति होती
है। दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करने से प्रेतत्व की
प्राप्ति होती है तथा पश्चिम की ओर मुख करके भोजन करने
से व्यक्ति रोगी होता है। भोजन की थाली कभी भी एक
हाथ से नहीं पकड़नी चाहिए। ऐसा करने से भोजन प्रेतयोनि
में चला जाता है। भोजन की थाली को सदैव आदरपूर्वक
दोनों हाथ लगाकर ही टेबल तक लाना चाहिए। यदि जमीन
पर बैठकर खाना-खाना है तो भोजन की थाली को सीधे
जमीन पर न रखकर किसी चौकी या आसन पर रखकर ही
भोजन ग्रहण करना चाहिए।
सोते समय गृहस्वामी का सिर सदैव दक्षिण केी तरफ ही
होना चाहिए इससे आयु वृद्धि होती है एवं गृह स्वामी का
पूर्ण प्रभुत्व घर पर बना रहता है। यदि प्रवास पर हों तो
पश्चिम की ओर सिर करके ही सोना चाहिए। जिससे
जितनी जल्दी हो सके अपने घर वापस आ सकें। घर में सीढ़ियों
का स्थान पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर ही
होना चाहिए, कभी भी उत्तर-पूर्व में सीढ़ियां न बनवाएं।
सीढ़ियों की संखया हमेशा विषम ही होनी चाहिए जैसे-
11, 13, 15 आदि। यदि घर में सीढ़ियों के निर्माण संबंधी
कोई दोष रह गया हो तो मिट्टी की कटोरी से ढक कर उस
स्थान पर जमीन के नीचे दबा दें।
ऐसा करने से सीढ़ियों संबंधी वास्तु दोषों का नाश होता है।
संध्या के समय घर में एक दीपक अवश्य जलाएं तथा ईश्वर से अपने
द्वारा किए गये पापों के लिए क्षमा याचना करें। यदि धन
संग्रह न हो पा रहा हो तो ”ऊँ श्रीं नमः” मंत्र का जप करें एवं
सूखे मेवे का भोग लक्ष्मी जी को लगाएं। यदि इन सब बातों
का ध्यान रखा जाए तो विघ्न, बाधाएं, परेशानियां हमें छू
भी नहीं सकेंगी, खुशियां हमारे घर का द्वार चूमेंगी, हमारे घर
की सीढ़ियां हमारे लिए सफलता की सीढ़ियां बन जाएंगी
तथा घर की बगिया हमेशा महकती रहेगी तथा घर का प्रत्येक
सदस्य प्रगति करता रहेगा।

गुरुवार, 19 मार्च 2015

हॉलमार्क लगा सोने के भी पूरी तरह खरा होने की गारंटी नहीं

सोने पर लगा हॉलमार्क सिर्फ शुद्धता की गारंटी नहीं, भरोसे का भी प्रतीक है। लेकिन हॉलमार्किंग सेंटर्स इस भरोसे को तोड़ रहे हैं। जो सोना आप खरीद रहे हैं, वह पूरा खरा ही है, इसकी कोई गारंटी नहीं है। हॉलमार्क लगा होने के बावजूद नहीं। हॉलमार्किंग सेंटर्स 18 कैरेट सोने से बनी ज्वैलरी पर भी 22 कैरेट तक का हॉलमार्क लगा रहे हैं। इसका सीधा-सीधा नुकसान उपभोक्ताओं का ही है। भास्कर ने इस पूरे गोरखधंधे की पड़ताल की। स्टिंग ऑपरेशन के जरिए सच जाना। यह स्टिंग जयपुर में किया गया, लेकिन इससे जो खुलासा हुआ वह चौंकाने वाला है और पूरे देश का सच हो सकता है।

 

पहली बार भास्कर सामने लाया हॉलमार्किंग से ठगी का गणित

ठगी किस तरह- मुनाफा बढ़ाने को बिना जांचे हॉलमार्किंग
>कुछ ज्वैलर्स 18 कैरेट शुद्धता वाले स्वर्ण आभूषणों पर 22 कैरेट हॉलमार्क निशान लगाकर बेच रहे हैं।
>कुछ तो 22/20 कैरेट ज्वैलरी पर भी हॉलमार्क का ठप्पा लगाकर बेच रहे हैं, जबकि ऐसी ज्वैलरी पर हॉलमार्क हो ही नहीं सकता।
>हॉलमार्किंग सेंटर प्रति ज्वैलरी 25 रुपए का शुल्क लेते हैं। चूंकि ऐसे मुनाफा कम होता है, इसलिए सेंटर्स बिना शुद्धता जांचे ज्वैलर के मन मुताबिक हॉलमार्किंग कर देते हैं। बदले में ज्वैलर्स से ज्यादा चार्ज करते हैं।

 

हमने यूं पकड़ी...एक ठप्पे से 18 कैरेट का सोना बना 22 कैरेट का

> आभूषण कारोबारी सुरेंद मांधणा ने भास्कर के कहने पर सालासर हालमार्किंग सेंटर से एक अंगूठी पर हॉलमार्किंग कराई। 
> अंगूठी 18 कैरेट की थी, मांधणा के कहने पर उस पर 22 कैरेट हॉलमार्क लगा दिया गया। जांच-परख तक नहीं की। सिर्फ कीमत ले ली।

पकड़े जाने पर दी सफाई
संभव है कि गलती से किसी आभूषण पर गलत हॉलमार्किंग कर दी गई हो। -उदय सोनी, निदेशक, सालासर हॉलमार्किंग सेंटर

 

सरकार ने बीआईएस से मांगी रिपोर्ट

हॉलमार्किंग स्कीम 14 साल पहले शुरू हुई है। अब सरकार इसे कानूनी मान्यता देने जा रही है। इसके लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस)  एक्ट में संशोधन होगा। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने सोमवार को बीआईएस एक्ट 1986 में संशोधन के बारे में सभी पक्षों से चर्चा की। पासवान ने पूछ- क्या अलग-अलग कैरेट के गोल्ड के लिए अलग-अलग रेट्स हैं? उन्होंने इस बारे में अफसरों से रिपोर्ट मांगी है। उन्‍होंने कहा, 'मैंने तो आज तक 18-24 कैरेट गोल्ड ही सुना था। 9 कैरेट गोल्ड भी होता है, पता नहीं था।'

शुद्धता की गारंटी देने वाले हॉलमार्क सेंटर तो ग्राहकों के साथ छल कर ही रहे हैं। मॉनिटरिंग के जिम्मेदार भी ‘सो’ रहे हैं। खुद ज्वैलर्स मानते हैं कि 22 कैरेट गोल्ड में ग्राहकों को 91.6% शुद्धता मिलनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 88 फीसदी ही मिल पा रही है।

 

> ग्राहकों को हर माह 12 करोड़ रु. की चपत (केवल राजस्‍थान में) 
> 3500 से ज्यादा ज्वैलर्स राजस्थान भर में
> 300 के पास ही है हॉलमॉर्किंग लाइसेंस
> 70% हॉलमार्किंग दिल्ली में (जयपुर में बिकने वाली ज्वैलरी की)

 

हद तो तब... ज्वैलर नहीं ले रहे शुद्धता की गारंटी

कोयम्बटूर ज्वैलरी एसो. ने हाल ही कोर्ट में याचिका में कहा है कि शुद्धता की जवाबदेही हॉलमार्क सेंटर्स की होनी चाहिए। इसी आधार पर उन्हें उस नियम के खिलाफ स्टे मिला, जिसमें जिम्मेदारी ज्वैलर्स पर थी।

 

सेंटरों की ही है जिम्मेदारी

सोने में शुद्धता की जिम्मेदारी हॉलमार्किंग सेंटर्स की है। गड़बड़ियां वहीं हो रही हैं। -कैलाश मितल, अध्यक्ष, जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी

 

शिकायत नहीं मिलती
कुछ सेंटर बिना जांचे हॉलमार्किंग कर रहे हैं, पर उपभोक्ताओं से शिकायत नहीं मिलती। -ए. के सिन्हा, निदेशक,

बीआईएस, जयपुर

शुद्धता का यह है सच- 22 कैरेट में मिलनी चाहिए 91.3% शुद्धता, मिल रही 88%

राजस्‍थान की बात करें तो राज्‍य के आभूषण विक्रेता हर दिन औसतन 200 किलो सोने के आभूषण बेचते हैं। इनमें से लगभग बीस फीसदी यानी 40 किलो हाॅलमार्क ज्वैलरी होती है। आभूषण विक्रेताओं से बातचीत के आधार पर 22 कैरेट  हाॅलमार्क ज्वैलरी में सोने की शुद्धता 91.6% होनी चाहिए। लेकिन यह औसतन 88% ही बैठती है। ग्राहक को हर दस ग्राम आभूषणों की खरीद पर चार फीसदी यानी मौजूदा कीमतों पर 1,000 रु. का नुकसान होता है। ऐसेे में 40 किलो हाॅलमार्क ज्वैलरी की खरीद पर ग्राहकों को रोज 40 लाख रुपए की चपत लग रही है। इसके लिए बीआईएस और हालमार्क सेंटर जिम्मेदार है।

 

5 निशान देखकर खरीदें ज्वैलरी
1.    बीआईएस का त्रिकोण वाला लोगो।
2.    कैरेट का नंबर। यह प्रतिशत में लिखी होगी। उदाहरण के तौर पर-23 कैरेट ज्वैलरी पर लिखा होगा 958 यानी 95.8 फीसदी शुद्धता।
3.    हॉलमार्किंग सेंटर का लोगो।
4. जिस साल ज्वैलरी बनी उसका कोड।
5. ज्वैलरी शॉप का नाम।

http://m.bhaskar.com/news/referer/521/RAJ-JAI-sting-operation-of-fraud-in-gold-jewelry-4826333-PHO.html?pg=2

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

Kuchh vaastu tips

🔴🔴🔴🔴
💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवश्य
 लगाएं ।

💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |

💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं।

💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।

💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |

💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |

💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |

💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं |

💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |

💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |

💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |

💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |

💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |

💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |